Enter your Email Address to subscribe to our newsletters

कानपुर, 20 फरवरी (हि.स.)। औषधि क्षेत्र में नवाचार आधारित विकास के लिए उद्योग और शिक्षा जगत का सहयोग बेहद जरूरी है। इस तरह की पहल स्वदेशी अनुसंधान को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्टार्टअप संस्कृति को मजबूत करती हैं और आम जनता के लिए सुलभ स्वास्थ्य समाधान विकसित करने में मददगार साबित होंगी। यह बातें शुक्रवार को औषधि विभाग के सचिव मनोज जोशी ने कही।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर औषधीय अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘अमृतव’ (औषधीय अनुसंधान, नवाचार, रूपांतरण एवं मूल्य संवर्धन गठबंधन) कार्यक्रम के कोहोर्ट-2 का शुभारंभ नई दिल्ली स्थित शास्त्री भवन में औषधि विभाग के सचिव मनोज जोशी द्वारा किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम के पांच विजेताओं की घोषणा की गई।
यह कार्यक्रम बोहरिंगर इंगेलहाइम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व समर्थित पहल है, जिसे स्टार्टअप इनक्यूबेशन एवं नवाचार केंद्र (एसआईआईसी), आईआईटी कानपुर द्वारा राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, रायबरेली के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य शैक्षणिक और संस्थागत औषधीय अनुसंधान को उद्यमिता से जोड़ते हुए बाज़ार-उन्मुख नवाचारों में परिवर्तित करना है।
कोहोर्ट-2 के अंतर्गत चयनित पांच विजेताओं को अनुदान सहायता प्रदान की गई। इसमें तीन संकाय सदस्यों को प्रत्येक आठ लाख रुपये तथा दो शोधार्थियों को प्रत्येक छह लाख रुपये दिए गए। इसके साथ ही चयनित प्रतिभागियों को मेंटरशिप, नियामक मार्गदर्शन, बौद्धिक संपदा सहायता और बाज़ार-प्रवेश से जुड़ा परामर्श भी मिलेगा।
आआईटी कानपुर की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार एसआईआईसी, आईआईटी कानपुर वर्ष 2000 से नवाचार और स्टार्टअप को बढ़ावा दे रहा है और वर्तमान में सैकड़ों स्टार्टअप्स को सहयोग प्रदान कर रहा है। यह पहल देश में औषधीय अनुसंधान, उद्यमिता और जन-स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप