संघ किसी वर्ग विशेष के विरोध या स्पर्धा के लिए नहीं बना: डॉ. मोहन भागवत
संघ का मूल उद्देश्य सत्ता नहीं हिन्दू समाज का संगठन करना है मेरठ, 20 फरवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डाॅ. मोहन राव भागवत ने शुक्रवार को माधवकुंज शताब्दी नगर में मेरठ व बृज प्रान्त के राष्ट्रीय व अन्तराराष्ट्रीय खिलाड़ियों के साथ
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डा.मोहनराव भागवत


कार्यक्रम में उपस्थित खिलाड़ी


संघ का मूल उद्देश्य सत्ता नहीं हिन्दू समाज का संगठन करना है

मेरठ, 20 फरवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डाॅ. मोहन राव भागवत ने शुक्रवार को माधवकुंज शताब्दी नगर में मेरठ व बृज प्रान्त के राष्ट्रीय व अन्तराराष्ट्रीय खिलाड़ियों के साथ संवाद किया। इस अवसर पर सरसंघचालक ने खिलाड़ियों के प्रश्नों के उत्तर भी दिए। डाॅ. भागवत ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ किसी वर्ग विशेष के विरोध या स्पर्धा के लिए नहीं बना है। संघ को किसी प्रकार की सत्ता भी नहीं चाहिए। संघ का मूल उद्देश्य समस्त हिन्दू समाज का संगठन करना है।

डाॅ भागवत ने कहा कि यदि संघ को समझना है तो संघ के अन्दर आना होगा। संघ के स्वयंसेवक आज विविध क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं। संघ के स्वयंसेवक राजनीतिक क्षेत्र में काम कर रहें हैं। इसका यह मतलब नहीं है कि संघ को राजनीतिक दृष्टिकोण से समझा जा सकता है। कहने का अभिप्राय यह है कि संघ को समझने के लिए समग्र दृष्टिकोण भीतर आकर ही समझा जा सकता है।

डाॅ भागवत ने कहा कि भारत को भौगोलिक सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता। उन्होंने हिन्दू शब्द को उद्घृत करते हुए बताया कि हिन्दू कोई जाति नहीं है यह तो एक विशेषण है हम देखते हैं कि जब-जब हमारी एकता में कमी आयी है, तब-तब भारत संकट में आया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ऐसी सब स्थितियों से अवगत है। इसलिए समाज जीवन के लगभग प्रत्येक क्षेत्र में ऐसी समस्याओं को दूर करने के लिए प्रयास कर रहा है।

सरसंघचालक ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना हिन्दू समाज के संगठन को आधार मानते हुए हुई और आज भी हमारा यह काम जारी है और इस कार्य की पद्धति का नाम ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ है। संघ का केवल एक ही काम है और वह है सम्पूर्ण हिन्दू समाज के संगठन के लिए व्यक्ति निर्माण करना। उन्होंने कहा कि आज देशभर में संघ के 45 प्रान्तों में संघ के स्वयंसेवकों के एक लाख तीस हजार से अधिक सेवा प्रकल्प चल रहे हैं। यह सभी सेवा कार्य किसी सरकारी सहायता से नहीं बल्कि अपने संसाधनों से चलते हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय के कुलपति मेजर दीपचन्द्र अहलावत ने कहा कि संघ खेल को केवल व्यक्ति की शारीरिक क्षमता का उपक्रम नहीं मानता है। संघ खेल को भी संस्कार के रूप में देखता है क्योंकि खेल के माध्यम से संस्कार के रूप में भी देखता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ खेल सहित समाज जीवन के विविध आयामों मे अतुलनीय कार्य कर रहा है। इसलिए हम सभी खिलाड़ियों को इस विचार के साथ जुड़ना चाहिए। सह क्षेत्र संघचालक प्रो नरेन्द्र कुमार तनेजा ने सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन संघ के प्रान्त सम्पर्क प्रमुख विजय गोयल ने किया।

हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन