दिल्ली में कारीगर बाजार की शुरुआत, 200 से अधिक कलाकृतियों का किया प्रदर्शन
नई दिल्ली, 20 फ़रवरी (हि.स.)। दिल्ली में पहली बार कारीगर बाजार भारत की जीवंत हस्तशिल्प परंपराओं की शुरुआत शुक्रवार को जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में की गई जो आगामी एक मार्च तक जारी रहेगा। इस आयोजन में देशभर से आए 200 से अधिक मास्टर कारीगरों और राष्ट्र
कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए एसपीएमसीआईएल के अध्यक्ष विजय रंजन सिंह।


नई दिल्ली, 20 फ़रवरी (हि.स.)। दिल्ली में पहली बार कारीगर बाजार भारत की जीवंत हस्तशिल्प परंपराओं की शुरुआत शुक्रवार को जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में की गई जो आगामी एक मार्च तक जारी रहेगा। इस आयोजन में देशभर से आए 200 से अधिक मास्टर कारीगरों और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता शिल्पकारों ने अपनी उत्कृष्ट कलाकृतियों का प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम का उद्घाटन सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एसपीएमसीआईएल) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक विजय रंजन सिंह ने किया। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे मंच भारतीय कारीगरों को व्यापक पहचान और बाजार से जोड़ने के साथ-साथ देश की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इस वर्ष कारीगर बाजार में कुछ कलाकृतियां दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। विशेष रूप से महाकाल की नगरी इंदौर क्षेत्र से आई नर्मदा नदी के कंकड़ों से निर्मित कलाकृतियां अपनी जीवंतता और कलात्मक सूक्ष्मता के कारण लोगों को मंत्रमुग्ध कर रही हैं। पत्थरों के प्राकृतिक आकार, रंग और बनावट को कलात्मक दृष्टि से संयोजित कर तैयार की गई ये कृतियां मानो स्वयं अभिव्यक्ति कर रही हों। इनमें भारतीय प्रकृति, आध्यात्मिकता और शिल्प कौशल का अद्भुत संगम दिखाई देता है।

इसके साथ ही तिरुपति से आई उत्कृष्ट लकड़ी की नक्काशी कला भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है, जिसमें कारीगरों ने मानो अपनी कला में प्राण फूंक दिए हों। यहां प्रदर्शित भगवान बालाजी और भगवान गणेश की भव्य लकड़ी की मूर्तियां, जिनकी कीमत लगभग 10 लाख बताई जा रही है, विशेष चर्चा में हैं। ये कलाकृतियां भारतीय कारीगरों की साधना, धैर्य और तकनीकी उत्कृष्टता का प्रतीक हैं।

इन कृतियों के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक निरंतरता पवित्र नदियों से लेकर मंदिर परंपराओं तक का जीवंत अनुभव देखने को मिलता है, जो दर्शाता है कि शिल्प केवल कला नहीं, बल्कि आस्था, पहचान और परंपरा की अभिव्यक्ति है।

इस अवसर पर कारीगर बाजार के निदेशक एवं सह-संस्थापक आमिर खान ने कहा कारीगर बाजार केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि भारत के कारीगर समुदायों को शहरों से जोड़ने का एक भावनात्मक प्रयास है। हर शिल्प अपने भीतर पीढ़ियों का ज्ञान, संस्कृति और पहचान समेटे हुए है।

उन्होंने बताया कि मेले में लाइव शिल्प प्रदर्शन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और क्षेत्रीय अनुभवों का भी आयोजन किया गया है, जिससे आगंतुक सीधे भारत की विविध कला परंपराओं से जुड़ सकें। कारीगर बाजार आगामी दिनों तक जारी रहेगा, जहां दिल्लीवासियों और पर्यटकों को एक ही स्थान पर भारत की समृद्ध शिल्प विरासत देखने का अवसर मिलेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी