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भागलपुर, 20 फ़रवरी (हि.स.)। भागलपुर में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को समाप्त करने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से शुक्रवार को 100 दिवसीय बाल विवाह मुक्त भारत अभियान की शुरुआत की गई। यह अभियान राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण तथा महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के निर्देशानुसार संचालित किया जा रहा है।
कार्यक्रम का आयोजन व्यवहार न्यायालय परिसर स्थित डीएलएसए कार्यालय में किया गया, जहां अधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम लोगों की भागीदारी देखी गई। अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज में बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति जागरूकता फैलाना और लोगों को कानूनी प्रावधानों की जानकारी देना है।
कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि बाल विवाह न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि इससे बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। विशेष रूप से बालिकाओं के शारीरिक और मानसिक विकास पर इसका नकारात्मक असर पड़ता है, जिससे उनका संपूर्ण जीवन प्रभावित होता है।
अधिकारियों ने जानकारी दी कि बाल विवाह की रोकथाम के लिए सरकार द्वारा कई कानूनी और सामाजिक पहलें चलाई जा रही हैं। इसके तहत टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 15100 और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर किसी भी संदिग्ध बाल विवाह की सूचना दी जा सकती है।
सूचना मिलने पर संबंधित विभाग तत्काल कार्रवाई कर बाल विवाह को रोकने का प्रयास करेगा। साथ ही पंचायत स्तर तक जागरूकता अभियान चलाकर अभिभावकों को समझाने की योजना बनाई गई है।
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि बाल विवाह रोकने के लिए केवल कानून पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज की मानसिकता में बदलाव जरूरी है। इसके लिए स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों, स्वयंसेवी संस्थाओं और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। लोगों से अपील की गई कि वे बाल विवाह जैसी कुरीति के खिलाफ आवाज उठाएं और बच्चों को शिक्षा तथा सुरक्षित भविष्य प्रदान करने में सहयोग करें।
अभियान के तहत आने वाले दिनों में विभिन्न गांवों और शहरी क्षेत्रों में जागरूकता रैलियां, विधिक साक्षरता शिविर, नुक्कड़ नाटक और परामर्श कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन गतिविधियों के माध्यम से लोगों को बाल विवाह निषेध अधिनियम, बच्चों के अधिकार और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। विशेष रूप से किशोर-किशोरियों को शिक्षा से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया जाएगा।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पदाधिकारियों ने विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयासों से बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई को समाप्त किया जा सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर