जांच से संरक्षण और जांच एजेंसियों की स्वायत्तता के बीच संवैधानिक संतुलन
अभिषेक शुक्ल
विनीत नारायण से तेजाराम तक का सफर बताता है कि ईमानदार प्रशासनिक निर्णयों को संरक्षण देना जितना जरूरी है, भ्रष्टाचार की जांच को निर्बाध रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। धारा 17ए पर सर्वोच्च न्यायालय की ताजा व्याख्या ने इसी संवैधानिक बहस
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