स्वबोध और सनातन एकता का व्यावहारिक अर्थ समझाता डॉ. भागवत उद्बोधन
डॉ. मयंक चतुर्वेदी भारत की सभ्यतागत पहचान का मूल प्रश्न यह है कि विविधताओं से भरा समाज अपनी एकता को किस आधार पर समझता है और उसे व्यवहार में कैसे उतारता है। भाषा, जाति, पंथ, प्रांत, खान-पान और रीति-रिवाजों की भिन्नताओं के बीच भारत को एक सूत्र में

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