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देहरादून, 09 जनवरी (हि.स.)। दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र की ओर से शुक्रवार को पुस्तकालय के एम्फीथिएटर में बच्चों के लिए दो घंटे की रचनात्मक नाट्य कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यशाला के दौरान बच्चों ने स्वर-प्रक्षेपण, शारीरिक गतियों और अभिनय की मूलभूत तकनीकों का अभ्यास किया। कार्यक्रम में आसरा ट्रस्ट, कॉन्वेंट ऑफ जीसस एंड मैरी, सेंट जोसेफ्स अकादमी, गुरु राम राय सहित विभिन्न संस्थानों के लगभग 30 बच्चों ने भाग लिया।
इस कार्यशाला का संचालन उभरते हुए रंगमंच प्रतिभा वैभव तिवारी ने किया, जो मराठी नाटककारों के नाटकों के निर्देशन के लिए जाने जाते हैं। वैभव तिवारी अपने निर्देशन में शारीरिक गतियों और भाव-भंगिमाओं के प्रभावी प्रयोग के लिए प्रसिद्ध हैं। वे थिएटर इन एजुकेशन तकनीकों के माध्यम से बच्चों को शरीर को मुक्त करने और अभिव्यक्ति को जीवंत बनाने का अवसर प्रदान करते हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार, रंगमंच बच्चों में आलोचनात्मक चिंतन और रचनात्मक अभिव्यक्ति के विकास का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इसी दृष्टिकोण के अनुरूप, दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र का मानना है कि बच्चों को रंगमंच और पुस्तकों के पात्रों से परिचित कराना आवश्यक है,जिससे पुस्तकें उनके लिए जीवंत बन सकें और वे स्वयं कहानियां रचने की क्षमता विकसित कर सकें। इस दिशा में वैभव तिवारी एक कुशल शिक्षक और संवेदनशील मार्गदर्शक के रूप में बच्चों के साथ सार्थक संवाद स्थापित करते हैं।
कार्यक्रम में दून पुस्तकालय की बाल अनुभाग प्रभारी मेघा ऐन विल्सन, लाइब्रेरियन डी.के.पांडेय, रंगमंच कलाकार अंशिका, शिक्षक, लेखक, अभिनेता और अन्य समुदाय सदस्य उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार