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माहेश्वरी ग्लोबल कन्वेंशन में बोले केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री, कहा-श्रीकृष्ण के विराट रूप की तरह यह महाकुंभ समाज के युवाओं में भरेगा आत्मविश्वास
जोधपुर, 09 जनवरी (हि.स.)। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि इतिहास और धर्म में भगवान श्रीकृष्ण जैसा शिक्षक और अर्जुन जैसा श्रद्धालु कोई नहीं था। महाभारत के युद्ध से पहले अर्जुन जब अपनों से युद्ध करने को लेकर संशय में थे, तब श्रीकृष्ण ने गीता के 700 श्लोकों के माध्यम से उन्हें कर्तव्य का बोध कराया। बावजूद इसके जब अर्जुन का अंतर्द्वंद्व पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ, तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपना विराट रूप प्रकट कर उनके मन के संताप को दूर किया। उस विराट दर्शन मात्र से अर्जुन के भीतर नया आत्मविश्वास जागा और वे पूरी दृढ़ता के साथ युद्धभूमि में उतरे।
अखिल भारतीय माहेश्वरी महासभा के शुक्रवार से प्रारंभ माहेश्वरी ग्लोबल कन्वेंशन में शेखावत ने कहा कि जिस प्रकार श्रीकृष्ण के विराट रूप ने अर्जुन को प्रेरणा और आत्मबल दिया, उसी प्रकार यह माहेश्वरी महाकुंभ समाज के युवाओं में आत्मविश्वास, लक्ष्यबोध और नई ऊर्जा का संचार करेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि देश-विदेश में बसे माहेश्वरी समाज का कोई भी बच्चा इस महाकुंभ से प्रेरित हुए बिना नहीं रहेगा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि माहेश्वरी समाज ने वर्ष 2030 तक 100 से अधिक सिविल सर्वेंट तैयार करने और एक लाख से ज्यादा उद्यमिता के अवसर सृजित करने का जो लक्ष्य रखा है, वह उसी ‘विराट दृष्टि’ का परिणाम है। उन्होंने कहा कि यह मंच केवल धार्मिक या सामाजिक आयोजन तक सीमित नहीं है, अपितु व्यापारिक सहयोग, प्रोफेशनल नेटवर्किंग, युवाओं के नेतृत्व विकास, महिला सशक्तीकरण और समाज में व्याप्त चुनौतियों के समाधान के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगा।
शेखावत ने कहा कि आर्थिक योगदान का अपना महत्व है, परंतु समाज के करीब 40 हजार लोगों द्वारा अपने समय का दान देना सबसे बड़ी पूंजी है। यही समर्पण किसी भी समाज को आगे बढ़ाने का आधार बनता है। उन्होंने कहा कि इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में दूर-दराज से बहुत से लोग आयेंगे, ऐसे में इस कार्यक्रम योगदान दे रहे लोगों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि जब उन्होंने समय निकालकर अपना योगदान दिया है, तभी यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न होगा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि माहेश्वरी समाज द्वारा मिले पारिवारिक स्नेह और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उन्हें जब भी देश या दुनिया में कहीं प्रवास का अवसर मिलता है, माहेश्वरी समाज हमेशा परिवार की तरह उनके साथ खड़ा रहा है। समाज का यह विश्वास, अपनापन और प्रेम उनके लिए अत्यंत मूल्यवान है और यही सामाजिक एकता भारत की असली शक्ति है।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश