आईजीएमसी मारपीट मामला: प्रदेश सरकार ने डॉ. राघव नरूला की बर्खास्तगी वापस ली, आदेश जारी
शिमला, 09 जनवरी (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश सरकार ने आईजीएमसी शिमला में हुए मारपीट मामले में सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. राघव नरूला की सेवाएं समाप्त करने का आदेश वापस ले लिया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से शुक्रवार को जारी आदेश में कहा गय
आईजीएमसी मारपीट मामला: प्रदेश सरकार ने डॉ. राघव नरूला की बर्खास्तगी वापस ली, आदेश जारी


शिमला, 09 जनवरी (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश सरकार ने आईजीएमसी शिमला में हुए मारपीट मामले में सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. राघव नरूला की सेवाएं समाप्त करने का आदेश वापस ले लिया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से शुक्रवार को जारी आदेश में कहा गया है कि दोबारा गठित जांच समिति की सिफारिशों और उपलब्ध तथ्यों पर विचार करने के बाद यह निर्णय लिया गया है।

स्वास्थ्य विभाग के आदेश के अनुसार 22 दिसंबर 2025 को आईजीएमसी शिमला के पुरुष पल्मोनरी वार्ड में मरीज अर्जुन (36 वर्ष) और डॉ. राघव नरूला के बीच कहासुनी के बाद हाथापाई हुई थी। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। मामले की प्रारंभिक जांच के आधार पर उसी दिन डॉ. राघव नरूला को सीनियर रेजिडेंसी से निलंबित कर दिया गया था और बाद में 24 दिसंबर 2025 को उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गई थीं।

इसके बाद सरकार ने मामले की दोबारा जांच के लिए एक नई समिति गठित की। समिति ने 2 जनवरी 2026 को आईजीएमसी में जांच की और अपनी रिपोर्ट में कहा कि यह घटना दोनों पक्षों के गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार का नतीजा थी। समिति ने इसे अचानक गुस्से में हुआ एक अलग-थलग मामला बताया और कहा कि डॉ. राघव नरूला के खिलाफ पहले कोई शिकायत या अनुशासनहीनता का रिकॉर्ड नहीं है।

जांच समिति ने यह भी उल्लेख किया कि डॉ. राघव नरूला ने बिना शर्त माफी मांगी है और इस घटना पर गहरा पछतावा जताया है। समिति का मानना था कि अनुशासनात्मक कार्रवाई का उद्देश्य सुधार होना चाहिए न कि केवल दंड। इसलिए समिति ने सरकार को बर्खास्तगी के आदेश पर सहानुभूतिपूर्वक पुनर्विचार करने की सिफारिश की।

इन सिफारिशों को स्वीकार करते हुए स्वास्थ्य सचिव प्रियंका बसु इंग्टी द्वारा जारी आदेश में डॉ. राघव नरूला की संविदा सेवाएं बहाल कर दी गई हैं। हालांकि आदेश में उन्हें भविष्य में उच्चतम पेशेवर आचरण, संयम और अनुशासन बनाए रखने की सख्त हिदायत दी गई है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि भविष्य में ऐसी किसी भी घटना की पुनरावृत्ति होने पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि काफी संवेदनशील रही है। 22 दिसंबर को हुई इस घटना के बाद रेजिडेंट डॉक्टरों ने प्रदेशभर में हड़ताल शुरू कर दी थी। इससे आईजीएमसी समेत कई अस्पतालों में ओपीडी और ऑपरेशन प्रभावित हुए। बाद में सरकार के आश्वासन के बाद डॉक्टरों ने हड़ताल समाप्त की थी।

30 दिसंबर को इस विवाद का मानवीय और भावुक अंत भी देखने को मिला जब मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के मीडिया सलाहकार नरेश चौहान के कार्यालय में डॉक्टर और मरीज के बीच समझौता हुआ। डॉ. राघव नरूला और मरीज अर्जुन सिंह पंवार ने एक-दूसरे से माफी मांगकर गिले-शिकवे खत्म किए और शिकायतें वापस लेने पर सहमति जताई। दोनों परिवारों की मौजूदगी में हुए इस समझौते ने यह संदेश दिया कि संवाद और समझदारी से बड़े विवाद भी सुलझाए जा सकते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा