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-वोट चोरी रोकने की मांग को लेकर असम के मुख्य चुनाव अधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया
गुवाहाटी, 09 जनवरी (हि.स.)। असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) ने असम प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप सैकिया पर एक इंटरनल वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए पार्टी कार्यकर्ताओं को 60 विधानसभा सीटों पर भाजपा को वोट न देने वाले लोगों की लिस्ट बनाने और वोटर लिस्ट से उनके नाम हटाने की व्यवस्था करने का निर्देश देने का आरोप लगाया है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कांग्रेस पार्टी ने अन्य विपक्षी पार्टियों के साथ मिलकर शुक्रवार काे दिसपुर पुलिस थाने में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई और पूरे मामले की पूरी जांच की मांग की।
एफआईआर दर्ज कराते समय कांग्रेस सांसद रकीबुल हुसैन, पूर्व सांसद रिपुन बोरा, असम प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष मीरा बोरठाकुर, एजेपी अध्यक्ष लुरिनज्योति गोगोई, राइजर दल के नेता रसेल हुसैन, कबिंद्र चेतिया फुकन, सीपीआई (एम) नेता सुप्रकाश तालुकदार और सीपीआई (एमएल) नेता पंकज कुमार दास पुलिस स्टेशन में मौजूद थे।
एफआईआर में विपक्षी पार्टियों ने 4 जनवरी की वीडियो कॉन्फ्रेंस का जिक्र किया और पुलिस से उसका वीडियो फुटेज इकट्ठा करने की व्यवस्था करने की मांग की। विपक्षी प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस से सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि वोट चोरी की कथित साजिश में शामिल कोई भी व्यक्ति जवाबदेही से बच न पाए।
एफआईआर दर्ज कराने के बाद, पूर्व सांसद और वरिष्ठ कांग्रेस नेता रिपुन बोरा ने मीडिया से कहा कि आज, सभी विपक्षी पार्टियां चुनाव आयोग के कानूनों और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम का उल्लंघन करने के लिए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया के खिलाफ दिसपुर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराने के लिए एक साथ आई हैं। हमने असम के मुख्य चुनाव अधिकारी को पांच मांगों वाला एक ज्ञापन भी सौंपा है।
यह कहते हुए कि इस मुद्दे पर मीडिया में काफी ध्यान दिया गया है, बोरा ने कहा कि चुनाव आयोग को इस मामले पर खुद ही कार्रवाई करनी चाहिए थी, लेकिन अब तक ऐसा कोई कदम नहीं देखा गया है। “चुनाव आयोग ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है। इसलिए, सभी विपक्षी पार्टियां उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए एफआईआर दर्ज कराने के लिए एकजुट हुई हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस को मामले की जांच करनी चाहिए और वीडियो कॉन्फ्रेंस की रिकॉर्डिंग इकट्ठा करनी चाहिए ताकि बातचीत को तोड़ा-मरोड़ा न जा सके, और सच्चाई असम के लोगों के सामने रखी जा सके।”
विपक्षी दलों ने ज्ञापन के माध्यम से बजाली, गोलकगंज और श्रीभूमि जैसे क्षेत्रों में ऐसे उदाहरणों पर भी प्रकाश डाला, जहां एक खास समुदाय से संबंधित और सक्षम प्राधिकारी द्वारा नियुक्त बीएलओ को कथित तौर पर अचानक और गलत इरादों से ड्यूटी से हटा दिया गया या ट्रांसफर कर दिया गया। उन्होंने मांग की कि चुनाव आयोग यह सुनिश्चित करे कि मुख्यमंत्री या भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सहित कोई भी व्यक्ति किसी भी तरह से मतदाता सूची के विशेष संशोधन (एसआर) को प्रभावित न कर सके।
ज्ञापन के माध्यम से, विपक्षी दलों ने मांग की कि मतदाता सूची की पूरी विशेष संशोधन (एसआर) प्रक्रिया के दौरान, प्रत्येक चुनाव अधिकारी और कर्मचारी चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करें और सत्ताधारी दल के किसी भी दबाव से सुरक्षित रहें। ---------------
हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय