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जोधपुर, 08 जनवरी (हि.स.)। प्रगतिशील दिव्यांगताओं को केंद्र में रखते हुए दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन 9 एवं 10 जनवरी को किया जा रहा है। यह सम्मेलन जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के टेपसे-हेप्सन सेंटर एवं स्वावलंबन फाउंडेशन राजस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होगा। सम्मेलन का विषय प्रगतिशील दिव्यांगता: अधिकार, हस्तक्षेप और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण रखा गया है।
टेपसे-हेप्सन सेंटर की निर्देशक डॉ. हेमलता जोशी ने बताया कि यह राष्ट्रीय सम्मेलन भारतीय पुनर्वास परिषद से स्वीकृत है, जिसमें भाग लेने वाले प्रतिभागियों को सीआरई पॉइंट्स प्रदान किए जाएंगे।
सम्मेलन का आयोजन जगशांति ऑडिटोरियम, बासनी में किया जाएगा। यह सम्मेलन प्रगतिशील दिव्यांगताओं से जुड़े चिकित्सीय, मनोवैज्ञानिक, शैक्षिक, सामाजिक, कानूनी एवं तकनीकी पहलुओं पर गहन चर्चा का मंच बनेगा। इसमें देशभर से वरिष्ठ चिकित्सक, मनोवैज्ञानिक, शोधकर्ता, नीति-निर्माता, विश्वविद्यालयों के शिक्षाविद् तथा दिव्यांगता क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ भाग लेंगे।
सम्मेलन के पहले दिन प्रगतिशील दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों एवं नीतिगत ढांचे, उपचार एवं थेरेपी में नवाचार, गतिशीलता बनाए रखने की रणनीतियां, परिवारों की भूमिका को सशक्त बनाने तथा दिव्यांगता समर्थन में एनजीओ की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान देंगे।
दूसरे दिन समावेशी शिक्षा, संज्ञानात्मक एवं व्यवहारिक पुनर्वास, प्रगतिशील दिव्यांग व्यक्तियों के लिए सतत करियर विकास, एआई एवं स्मार्ट टेक्नोलॉजी आधारित सहायक उपकरणों, जेनेटिक टेस्टिंग द्वारा प्रारंभिक पहचान तथा समावेशी भारत के निर्माण की दिशा में विशेषज्ञ अपने विचार साझा करेंगे।
क्या है प्रगतिशील दिव्यांगता
प्रगतिशील दिव्यांगता वे स्थितियां हैं जिनमें समय के साथ दिव्यांगता की गंभीरता बढ़ती जाती है, जिससे मांसपेशियों की शक्ति, संतुलन, गतिशीलता, दैनिक गतिविधियों की स्वतंत्रता और मानसिक-संज्ञानात्मक स्वास्थ्य प्रभावित होता है। प्रमुख उदाहरणों में मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, मल्टीपल स्केलेरोसिस, हंटिंगटन रोग, पार्किंसन रोग, एएलएस और एसएमए सहित अन्य शामिल हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश