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काठमांडू, 08 जनवरी (हि.स.)। ‘पेट्रोल में इथानोल मिलाने’ की प्रक्रिया को अब नेपाल सरकार ने अंततः आगे बढ़ा दिया है। लगभग दो दशक से नीतिगत चर्चा ं के बावजूद इस पर क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा था। मंत्रिपरिषद की बुधवार को हुई बैठक ने ‘पेट्रोल में इथानोल मिश्रण संबंधी आदेश–2082’ को स्वीकृति देकर व्यावहारिक रूप से लागू करने का रास्ता खोल दिया है।
नेपाल ऑयल निगम के कार्यकारी निदेशक डॉ. चण्डिकाप्रसाद भट्ट के अनुसार, यह मंजूरी दो दशख स अटकी हुई थी। अब राजपत्र में प्रकाशित होने वाले आदेश जारी किए जाने से इसके कार्यान्वयन के लिए मजबूत आधार तैयार हो गया है। निगम का निष्कर्ष है कि खनिज ईंधन (पेट्रोल) में जैविक ईंधन (इथेनॉल) मिलाने से देश की अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और स्वदेशी उद्योग को बहुआयामी लाभ होगा। कार्यकारी निदेशक भट्ट ने इथेनॉल को ‘बायो फ्यूल’ और पेट्रोल को ‘मिनरल फ्यूल’ बताते हुए कहा कि इनके मिश्रण से पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
पर्यावरण संरक्षण और नेपाल ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर वर्ष 2045 तक ‘नेट-जीरो कार्बन’ (शून्य कार्बन उत्सर्जन) हासिल करने की प्रतिबद्धता के संदर्भ में इस योजना को अत्यंत सहायक बताया गया है।
आर्थिक दृष्टिकोण से भी यह योजना नेपाल के व्यापार घाटे को कम करने में मददगार होगी। वर्तमान में नेपाल में पेट्रोल का शत-प्रतिशत आयात भारत से किया जाता है। निगम की योजना के अनुसार यदि पेट्रोल में 10 प्रतिशत इथेनॉल मिलाया जाता है तो पेट्रोल के आयात में सीधे 10 प्रतिशत की कटौती हो जाएगी।
डॉ. भट्ट ने कहा, “इससे पेट्रोल खरीदने के लिए विदेश जाने वाली बड़ी राशि देश में ही बच सकेगी और विदेशी मुद्रा भंडार में भी सुधार होगा।
उन्होंने बताया, “एक इथेनॉल प्लांट स्थापित करने में लगभग दो अरब रुपये का निवेश के निवेश की जरूरत होगी। । एक ही उद्योग से 300 से 500 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिल सकता है, जिससे रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण योगदान होगा।”
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास