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बेंगलुरु, 08 जनवरी (हि.स.)।कर्नाटक सरकार ने केंद्र की वीबीजी, रामजी योजना के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का फैसला किया है, जिसे केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को वापस लेने के बाद प्रतिस्थापित किया है। यह निर्णय गुरुवार को राज्य सरकार के मंत्रिमंडल की बैठक में किया गया है।
आज मंत्रिमंडल की बैठक के बाद राज्य के पर्यटन, कानून और संसदीय कार्य मंत्री एच.के. पाटिल ने पत्रकार वार्ता में कहा कि विकसित भारत-ग्राम आरएएम जी विधेयक, 2025 (वीबीजी, रामजी) को जनता की अदालत में ले जाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि संविधान के 73वें संशोधन के बाद देश में विकेंद्रीकरण हुआ है। इस योजना ने विकेंद्रीकरण को ठेस पहुंचाई है। उन्होंने कहा कि एमएनआरईजीए को वापस लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के रोजगार अधिकारों को छीनने का काम किया गया है। एमएनआरईजीए के माध्यम से पंचायतों में संपत्ति का निर्माण हो रहा था। अब, एक अमानवीय कानून लागू होने से, श्रमिकों को ठेकेदारों द्वारा किए जा रहे राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण कार्यों में काम करना पड़ रहा है। केंद्र सरकार ने श्रमिकों के हितों की रक्षा में कोई रुचि नहीं दिखाई है। इसके बजाय, इसने रोजगार के अधिकार को छीन लिया है। पंचायतों के पास गांवों में क्या काम किया जाना चाहिए, यह तय करने का अधिकार था। अब, इसे पूरी तरह से छीन लिया गया है और केंद्र सरकार निर्देश देगी कि काम कहां किया जाना चाहिए। कर्नाटक सरकार इस अमानवीय कानून का कड़ा विरोध करती है। उन्होंने कहा कि वे राजनीतिक, कानूनी और जनता की अदालत में लड़ेंगे।
उन्होंने कहा कि सतही तौर पर तो 125 दिनों का काम देने की बात कही जाती है, लेकिन असल में ऐसा नहीं हो सकता। इसके लिए धन उपलब्ध है। अनुदान का 40 फीसदी हिस्सा राज्य सरकार को वहन करना होगा। अगर वित्तीय बोझ बहुत अधिक हो तो संबंधित राज्यों से चर्चा की जानी चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों को लागू करने के बाद इसे नया जोड़ा गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश महादेवप्पा