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नई दिल्ली, 08 जनवरी (हि.स.)। दिल्ली स्थित इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) में गुरुवार को आवाज़ों के जुगनू: द वॉइस मास्टर्स ऑफ़ इंडिया' पुस्तक का लोकार्पण किया गया।
आईजीएनसीए की ओर से जारी विज्ञप्ति में बताया गया कि वर्षों के निरंतर प्रयासों के बाद, यह संग्रह किताब और ऑडियो, दोनों फॉर्मेट में जारी किया गया है।
इस अवसर पर ब्रॉडकास्टर और वॉइस एक्टर हरीश भिमानी ने कहा कि यह पुस्तक सिर्फ अक्षरों का संग्रह नहीं है, बल्कि उस 'अदृश्य प्राण तत्व' को पकड़ने का प्रयास है जो सामूहिक स्मृति में गूंज रहा है। उन्होंने कहा कि जब शब्द मौन हो जाते हैं, तब भी उसके स्वर शिल्प में सभ्यता की गूंज जीवित रहती है।
आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि आज के डिजिटल युग के बच्चों को हर चीज़ परोस कर मिल रही है, जिससे उनकी सोचने की शक्ति और रचनात्मकता कम हो रही है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अगली पीढ़ी की क्रिएटिविटी को नष्ट करने वाला बताया।
ब्रॉडकास्टर और वॉइस एक्टर शम्मी नारंग ने कहा कि जब किसी से मिले, तब स्पष्ट और अच्छा बोलने का प्रयास करें।
विशेष अतिथि वॉइस एक्टर सोनल कौशल ने कहा कि आवाज़ केवल ध्वनि नहीं है, बल्कि संस्कृति, परंपरा और स्मृति है। उनका मानना है कि आवाज़ तब तक जीवित रहती है जब तक उसमें सच्चाई होती है।
आईजीएनसीए के मुताबिक, इस पुस्तक में ऑल इंडिया रेडियो, एफएम चैनल, वॉइसओवर इंडस्ट्री, ब्रॉडकास्टिंग और मंचीय कविता परम्परा से जुड़े 31 लोगों की यात्रा के बारे में बताया गया है। यह पुस्तक रेडियो और आवाज पर आधारित नरेशन की उस परंपरा को दर्शाती है जिसने दर्शकों के साथ एक गहरा भावनात्मक रिश्ता बनाया है। इस पुस्तक की संयोजन एवं संकलनकर्ता डॉ. शेफाली चतुर्वेदी हैं। वक्ताओं ने डिजिटल युग में भी वॉइस-ओवर कला को एक ज़रूरी और प्रासंगिक सांस्कृतिक माध्यम बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया।
इस मौके पर मुख्य अतिथि ब्रॉडकास्टर और वॉइस एक्टर हरीश भिमानी, विशिष्ट अतिथि ब्रॉडकास्टर और वॉइस एक्टर शम्मी नारंग और विशेष अतिथि वॉइस एक्टर सोनल कौशल और आकाशवाणी के पहले न्यूज रीडर राजेन्द्र चुघ सहित अन्य गणमान्य जन मौजूद रहे।
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने की और स्वागत वक्तव्य आईजीएनसीए के मीडिया नियंत्रक अनुराग पुनेठा ने दिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी