राजगढ़ःधुं आ,हल्की सिंचाई कर पाले से फसलों का बचाव की सलाह
राजगढ़, 7 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में जनवरी माह के दौरान शीतलहर और पाले का खतरा बढ़ गया है। गिरते तापमान को देखते हुए कृषि विभाग ने फसलों को होने वाले नुकसान की आशंका जताते हुए किसानों के लिए आवश्यक सावधानियां और बचाव के उपाय बताए ह
फसलों का बचाव किया जा सकता है -कृषि वैज्ञानिक


राजगढ़, 7 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में जनवरी माह के दौरान शीतलहर और पाले का खतरा बढ़ गया है। गिरते तापमान को देखते हुए कृषि विभाग ने फसलों को होने वाले नुकसान की आशंका जताते हुए किसानों के लिए आवश्यक सावधानियां और बचाव के उपाय बताए हैं।

कृषि उप संचालक सचिन जैन ने बुधवार को किसानों को पाले से फसलों की सुरक्षा एवं सतर्कता के लिए सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि रात्रि में खेत की मेड़ों पर लगभग छह से आठ स्थानों पर कचरा व खरपतवार जलाकर धुंआ करें। यह प्रयोग इस प्रकार किया जाना चाहिए कि धुंआ सारे खेत में छा जाए, जिससे खेत के आसपास का तापमान 5 डिग्री सेल्सियस तक आ जाए। पाले की संभावना होने पर खेत की हल्की सिंचाई करें, जिससे मिट्टी का तापमान बढ़ जाए ताकि नुकसान की मात्रा कम हो सके। रस्सी का प्रयोग भी पाले से सुरक्षा प्रदान करता है, इसमें सुबह-सुबह दो व्यक्ति रस्सी को दोनों सिरों से पकड़ कर खेत के एक कोने से दूसरे कोने तक फसलों को हिलाते चलें, जिससे फसल पर रात का जमा पानी नीचे गिर जाए और पाले से फसल की सुरक्षा हो सके। इसके अतिरिक्त प्रति एकड़ आठ से दस किलो सल्फर डस्ट का भुरकाव करें, मावठा गिरने की स्थिति में एनएए का छिड़काव कर समस्या से बचा जा सकता है। उन्होंने बताया कि शीतलहर के कारण पौधे की पत्तियां व फूल झुलसते है, जो बाद में झड़ जाते है। शीतलहर का अत्यधिक असर दलहनी, तिलहनी, धनिया, मटर व आलू की फसलों पर पड़ता है। पौधों की पत्तियों पर पाले का प्रकोप रात 12 से सुबह 4 बजे के बीच अधिकांश होता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मनोज पाठक