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कोलकाता, 07 जनवरी (हि.स.)।
तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद ऋतब्रत बनर्जी ने अनाज की खरीद में बड़े पैमाने पर प्लास्टिक की बोरियों के इस्तेमाल के फैसले का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने इस मुद्दे पर केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह को पत्र लिखकर केंद्र सरकार के निर्णय पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
अपने पत्र में ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा अनाज खरीद में प्लास्टिक की बोरियों को अनुमति देना जूट उद्योग को कमजोर करने वाला कदम है। उन्होंने इसे वस्त्र मंत्रालय की सहमति से किया गया जूट के खिलाफ सरकारी संरक्षण वाला निर्णय बताया।
तृणमूल सांसद ने केंद्र सरकार के उस तर्क को भी खारिज किया, जिसमें जूट बोरियों की कमी को प्लास्टिक बोरियों की अनुमति का कारण बताया गया है। उनका कहना है कि जूट की कमी कोई प्राकृतिक समस्या नहीं है, बल्कि यह नीतिगत अस्थिरता का नतीजा है। जब जूट के दाम कम थे, तब भंडारण की कोई व्यवस्था नहीं की गई और जैसे ही कीमतें बढ़ीं, जूट को किनारे कर दिया गया। इस अस्थिर नीति ने बाजार का भरोसा तोड़ा है और जूट क्षेत्र से जुड़े लाखों लोगों की आजीविका को अस्थिर कर दिया है।
ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि इस नीति का सीधा असर जूट किसानों और जूट मिलों में काम करने वाले मजदूरों पर पड़ा है। पूरे जूट क्षेत्र में आर्थिक सुस्ती देखने को मिल रही है और इसकी वजह जूट की असफलता नहीं, बल्कि उसके खिलाफ बनाई गई नीतियां हैं।
उन्होंने पर्यावरण का मुद्दे उठाते हुए कहा कि एक तरफ सरकार टिकाऊ विकास और एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक को कम करने की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ एक नवीकरणीय, जैविक रूप से नष्ट होने वाले और श्रम आधारित भारतीय रेशे की जगह पेट्रोलियम से बने प्लास्टिक पैकेजिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने इसे व्यावहारिक नीति नहीं, बल्कि नीतिगत जिम्मेदारी से बचने वाला कदम बताया।
पत्र के अंत में तृणमूल सांसद ने चेतावनी दी कि जूट किसान और मजदूर केंद्र सरकार के इस फैसले को हल्के में नहीं लेंगे। उन्होंने कहा कि इतिहास इस फैसले को याद रखेगा और प्रभावित लोग यह भी याद रखेंगे कि कौन भारत के प्राकृतिक रेशे के साथ खड़ा रहा और किसने उसे हटाने की अनुमति दी।
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर