उमरिया: दूषित पानी पीने को मजबूर ग्रामीण, नल जल योजना बनी सफेद हाथी
उमरिया, 07 जनवरी (हि.स.)। मध्‍यप्रदेश के इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई 20 मौतों का का मामला अभी थमा नहीं कि अब उमरिया के मानपुर विधानसभा में भी देखने को मिल रहा है, जहां पर्यटन ग्राम आदिवासी नल जल योजना होने के बाद भी नदी नाले का पानी पीने के लि
दूषित पानी पीने को मजबूर ग्रामीण नल जल योजना बनी सफेद हाथी


उमरिया, 07 जनवरी (हि.स.)। मध्‍यप्रदेश के इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई 20 मौतों का का मामला अभी थमा नहीं कि अब उमरिया के मानपुर विधानसभा में भी देखने को मिल रहा है, जहां पर्यटन ग्राम आदिवासी नल जल योजना होने के बाद भी नदी नाले का पानी पीने के लिए मजबूर है जिससे बीमारी फैलने की आशंका बन रही है, यह पानी दूषित होने के साथ हानिकारक भी है। मगर इससे जिम्मेदारों को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है।

मामला जिले के मानपुर विधानसभा के मरईखुर्द ग्राम पंचायत का है, जहां शत प्रतिशत आदिवासी निवास करते हैं। वहां के निवासियों ने बताया कि बारिश के दिनों में तो गंदा पानी का उपयोग करना ही पड़ता है, लेकिन सूखे दिनों में भी हमारे यहां पानी की भारी समस्या है, ऐसा नहीं है कि सरकारों ने काम नहीं कराया, नल जल योजना‌ अंतर्गत 62 लाख रु कि लागत से पाइप लाइन के माध्यम से घर-घर तक नल से जल पहुंचाने के लिए पाइपलाइन बिछाई गई मगर एक दिन ही चला कर फोटो खिंचवाकर उसमें भी ताला जड़ दिया गया। एक से डेढ़ वर्ष बीत जाने के बाद भी गांव वालों को आज तक योजना का पानी नहीं मिला। लोग आज भी नदी नाले का गंदा पानी पीकर अपना जीवन यापन करने को मजबूर हैं।

सरपंच पति राज किशोर गोड़ ने बताया कि हमारे गांव में पीने के पानी की समस्या है, ये नल जल योजना की टंकी बनी है, पिछले साल पूरी हुई है, एक दिन चला कर दिखा दिया गया है, अब पानी के लिए जिसके पास कुआं है वो कुआं से लाते हैं और नहीं तो बाकी लोग नदी, नाला, खेत, तालाब से लाते हैं, जिसके कारण लोग बीमार भी होते हैं, यहां से अस्पताल 20 किलोमीटर दूर है 108 एंबुलेंस खाली होती है तो आ जाती है नहीं तो खुद ले जाना पड़ता है।

वहीं इस मामले में सीईओ जिला पंचायत उमरिया अभय सिंह ओहरिया का कहना है कि मामला यह है कि जब काम पूरा हो गया है तो ठेकेदार को तीन से चार माह तक चलाना रहता है और यदि रेगुलर चल रहा है तभी ग्राम पंचायत अपने हैंड ओवर करेगी अन्यथा की स्थिति में नहीं करेगी तो मैं यह लिखवा लेता हूं कि ट्रायल रन हो चुका है या नहीं यदि ट्रायल रन हो चुका है तो कितनी अवधि के लिए हुआ है कितना पूर्ण हुआ है उसे अवधि तक चला है या नहीं चला है, यदि चल चुका है तभी हम लोग अपने हैंडओवर लेंगे ।

गौरतलब है कि देश के प्रधानमंत्री के सपनों को चकनाचूर करने में यहां के अधिकारी और कर्मचारी कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। घर-घर तक नल से जल पहुंचने के लिए उमरिया जिले में कई सौ करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं, लेकिन अभी तक योजना का लाभ आदिवासी और आमजन तक नहीं पहुंच सका है, बल्कि नल जल योजना जिले में सफेद हाथी बन कर रह गई है।

हिन्दुस्थान समाचार / सुरेन्‍द्र त्रिपाठी