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जबलपुर, 07 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में बुधवार को हुई सुनवाई के बाद पुरुष उम्मीदवारों की याचिका का निराकरण हो गया है। इस मामले में पहले 100 प्रतिशत पद महिलाओ को आरक्षित कर दिए गए थे, अब यह शर्त हटाई गयी है। अब 13 जनवरी तक पुरुष उम्मीदवार आवेदन कर सकेंगे।
उल्लेखनीय है कि 16 दिसंबर को जारी भर्ती विज्ञापन में प्रदेश के सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में 286 अकादमिक पदों पर सीधी भर्ती के माध्यम से 40 एसोसिएट प्रोफेसर, 28 असिस्टेंट प्रोफेसर और 218 सिस्टर ट्यूटर की भर्ती में सभी पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए थे। इसके बाद अनेक पात्र पुरुष उम्मीदवार हाईकोर्ट पहुंचे थे।
याचिका में आरोप था कि मध्यप्रदेश सिविल सेवा (महिलाओं की नियुक्ति के लिए विशेष उपबंध) नियम, 1997 के तहत महिलाओं को शासकीय सेवाओं में अधिकतम 35 प्रतिशत आरक्षण दिया जा सकता हैं। सरकार के विभागीय भर्ती नियम तथा इंडियन नर्सिंग काउंसिल के मापदंड लिंग के आधार पर भेदभाव की अनुमति नहीं देते, फिर भी लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने केवल महिलाओं के लिए 100 प्रतिशत पद आरक्षित कर संवैधानिक प्रावधानों (अनुच्छेद 14, 15 और 16) की अवहेलना की है।
मध्यप्रदेश सरकार की महिला आरक्षण नीति यह 100% महिला आरक्षण, सर्वोच्च न्यायालय के इंद्रा साहनी मामले में निर्धारित 50% की अधिकतम आरक्षण सीमा का उल्लंघन करता है, जहाँ सामान्यतः कुल आरक्षण 50% से अधिक नहीं हो सकता। संविधान का अनुच्छेद 16(2) के तहत केवल लिंग के आधार पर किसी नागरिक को सरकारी रोजगार से वंचित करना प्रत्यक्ष भेदभाव है, अतः पुरुष उम्मीदवारों को पूरी तरह बाहर करना पूर्णत: असंवैधानिक है।
याचिकाकर्ताओं नौशाद अली एवं अन्य की ओर से अधिवक्ता विशाल बघेल ने पैरवी की।
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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक