भोपाल-इंदौर समेत मध्य प्रदेश के आठ शहरों में बढ़ा प्रदूषण, एनजीटी ने मांगी रिपोर्ट
भोपाल, 07 जनवरी (हि.स.)। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की भोपाल बेंच ने भोपाल और इंदौर सहित आठ शहरों में बढ़ते प्रदूषण पर चिंता व्यक्त की है। एनजीटी ने राज्य सरकार से 8 सप्ताह के भीतर इस मुद्दे पर रिपोर्ट पेश करने को कहा है। एनजीटी ने माना कि भोप
कोहरे के कारण बड़ी ठंड से राहत पाने के उपाय में लगे लोग


भोपाल, 07 जनवरी (हि.स.)। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की भोपाल बेंच ने भोपाल और इंदौर सहित आठ शहरों में बढ़ते प्रदूषण पर चिंता व्यक्त की है। एनजीटी ने राज्य सरकार से 8 सप्ताह के भीतर इस मुद्दे पर रिपोर्ट पेश करने को कहा है। एनजीटी ने माना कि भोपाल में वायु गुणवत्ता निर्धारित मानकों से काफी नीचे है और एक्यूआई 'बहुत खराब' से 'गंभीर' श्रेणी में चला गया है। यह स्थिति पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर संकट का कारण बन रही है।

एनजीटी ने बुधवार को यह आदेश आवेदक राशिद नूर खान की याचिका पर दिया। उनके वकील हर्षवर्धन तिवारी ने मामले में पक्ष रखा। एनजीटी ने अपने आदेश में कहा कि भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, देवास, सागर और सिंगरौली को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने 'नॉन-अटेनमेंट सिटी' घोषित किया है। इन शहरों में पिछले पांच वर्षों से पीएम-10 और पीएम-2-5 के स्तर लगातार राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानकों से अधिक बने हुए हैं।

भोपाल में पीएम-10 का वार्षिक औसत स्तर 130 से 190 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और पीएम 2-5 का स्तर 80 से 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पाया गया है, जो निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक है। एनजीटी ने यह भी बताया कि भोपाल, जिसे 'झीलों की नगरी' के नाम से जाना जाता है, अब शीतकाल में लगातार धुंध, कम दृश्यता और 'बहुत खराब' से 'गंभीर' श्रेणी के एक्यूआई का सामना कर रहा है। रियल-टाइम आंकड़ों के मुताबिक, कई रातों में एक्यूआई 300 से ऊपर दर्ज किया गया है।

एनजीटी ने यह स्पष्ट किया कि यह प्रदूषण केवल एक कारण से नहीं, बल्कि पराली जलाने, निर्माण और विध्वंस कार्यों से उड़ती धूल, वाहनों के उत्सर्जन, खुले में कचरा जलाने, लैंडफिल में आग, पटाखों का इस्तेमाल और औद्योगिक गतिविधियों के संयुक्त प्रभाव से उत्पन्न हो रहा है। इसके अलावा, एनजीटी ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली-एनसीआर में अपनाए गए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान और एयर-शेड आधारित नीति के बावजूद मध्य प्रदेश में अब तक कोई प्रभावी राज्यस्तरीय तंत्र लागू नहीं किया है। इससे वायु प्रदूषण की समस्या और अधिक गंभीर हो रही है।

एनजीटी ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों को नोटिस जारी किया है और एक ज्वाइंट कमेटी का गठन किया है। इस समिति में पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव, इप्को के प्रतिनिधि, नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव, परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य, और सीपीसीबी के पूर्व अतिरिक्त निदेशक डॉ. रविप्रकाश मिश्रा सहित अन्य शामिल होंगे।

समिति को 6 सप्ताह के भीतर प्रदूषण की स्थिति का मूल्यांकन करके कार्रवाई पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस मामले में नोडल एजेंसी नियुक्त किया गया है। अगली सुनवाई 18 मार्च को होगी।

हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर