मॉरीशस अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन में झारखंड का प्रतिनिधित्व करेंगी डॉ. पूनम, मिलेगा अंतरराष्ट्रीय हिंदी गौरव सम्मान
रांची, 07 जनवरी (हि.स.)। मॉरीशस में आयोजित होने जा रहे अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन में झारखंड की शिक्षाविद् एवं शोधकर्ता डॉ. पूनम को राज्य का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला है। इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर वे भारत–मॉरीशस संबंधों में हिंदी भाषा का योगदान
डॉ. पूनम की फाइल फोटो


रांची, 07 जनवरी (हि.स.)। मॉरीशस में आयोजित होने जा रहे अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन में झारखंड की शिक्षाविद् एवं शोधकर्ता डॉ. पूनम को राज्य का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला है। इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर वे भारत–मॉरीशस संबंधों में हिंदी भाषा का योगदान विषय पर अपना शोध आलेख प्रस्तुत करेंगी। यह जानकारी साहित्य संचय शोध संवाद फाउंडेशन के संस्थापक मनोज कुमार ने बुधवार को प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दी।

मनोज कुमार ने बताया कि यह झारखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है कि इस सम्मेलन के दौरान डॉ. पूनम को अंतरराष्ट्रीय हिंदी गौरव सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान हिंदी भाषा और साहित्य के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण शोध, लेखन और योगदान के लिए दिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि यह अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन हिंदी प्रचारिणी सभा, मॉरीशस, शिक्षा एवं मानव संसाधन मंत्रालय, मॉरीशस तथा भारतीय उच्चायोग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन की शैक्षणिक यात्रा 09 जनवरी से प्रारंभ होकर 14 जनवरी को सांस्कृतिक संध्या के साथ संपन्न होगी। इस दौरान विभिन्न देशों से आए विद्वान हिंदी भाषा, साहित्य, संस्कृति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में हिंदी की भूमिका पर मंथन करेंगे।

मनोज कुमार ने बताया कि इस सम्मेलन में भारत के अलावा सिंगापुर, थाईलैंड, इंडोनेशिया, नेपाल और जापान सहित कई देशों के प्रतिष्ठित साहित्यकार, भाषा विशेषज्ञ, शिक्षाविद् और शोधकर्ता भाग लेंगे। उन्होंने कतहा कि डॉ. पूनम को मिले इस अंतरराष्ट्रीय आमंत्रण से झारखंड सहित शैक्षणिक और साहित्यिक जगत में हर्ष और उत्साह का माहौल है।

उल्लेखनीय है कि डॉ. पूनम वर्तमान में राधा गोविंद विश्वविद्यालय, रामगढ़ के इतिहास विभाग में विभागाध्यक्ष के पद पर कार्यरत हैं। वे अब तक अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र प्रस्तुत कर चुकी हैं। उनके शोध और लेखन से संबंधित कई पुस्तकें भी प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी जन्मभूमि चंदवा (लातेहार) है। ---------------

हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar