एम्बुलेंस में सुनवाई, प्रशासनिक संवेदनशीलता पर उठे सवाल
मेदिनीपुर, 07 जनवरी (हि. स.)। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के अंतर्गत बुधवार को मेदिनीपुर में चलने-फिरने में असमर्थ दो वृद्ध मतदाताओं की सुनवाई एम्बुलेंस में ही कराई गई। यह मामला सामने आते ही निर्वाचन प्रक्रिया में मानवीय संवेदनशीलता और जमीनी
एम्बुलेंस में सुनवाई करते बीएलवो


मेदिनीपुर, 07 जनवरी (हि. स.)। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के अंतर्गत बुधवार को मेदिनीपुर में चलने-फिरने में असमर्थ दो वृद्ध मतदाताओं की सुनवाई एम्बुलेंस में ही कराई गई। यह मामला सामने आते ही निर्वाचन प्रक्रिया में मानवीय संवेदनशीलता और जमीनी स्तर पर प्रशासनिक समन्वय को लेकर प्रश्न उठने लगे। इस प्रकरण में बूथ स्तर के निर्वाचन अधिकारी और पीड़ित परिवार के बयानों में भी स्पष्ट विरोधाभास दिखाई दिया।

मेदिनीपुर सदर के जिलाधिकारी कार्यालय स्थित सुनवाई केंद्र में बुधवार को 70 वर्ष से अधिक आयु के दो पक्षाघातग्रस्त मतदाता—आलिमा बीबी और शेख मणिरुद्दीन—एम्बुलेंस से पहुंचे। दोनों ही स्वयं चलने-फिरने में असमर्थ हैं।

परिवार का कहना है कि यदि मतदाता सूची से नाम हटा दिया जाता, तो भविष्य में गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती थी, इसी आशंका के कारण उन्हें एम्बुलेंस से लाना पड़ा।

240 नंबर मतदान केंद्र के निवासी शेख मणिरुद्दीन का जन्म वर्ष 1960 में हुआ। वे पहले मेदिनीपुर शहर के 20 नंबर वार्ड स्थित नजरगंज क्षेत्र में रहते थे और लगभग 30 वर्ष पूर्व 18 नंबर वार्ड के पालबाड़ी इलाके में स्थायी रूप से बस गए। उनकी पत्नी पियरजान बीबी के अनुसार, वर्ष 2002 की मतदाता सूची में मणिरुद्दीन का नाम नहीं था, जबकि वर्ष 2025 की सूची में उनका नाम क्रमांक 252 पर दर्ज है।

परिवार का दावा है कि पिता के नाम के साथ नाम-संबंध निर्धारण किया गया है, जबकि निर्वाचन आयोग का कहना है कि ऐसा निर्धारण नहीं हुआ, इसी कारण सुनवाई का नोटिस जारी किया गया।

पिछले छह महीनों से शेख मणिरुद्दीन पक्षाघात से पीड़ित हैं। वे न तो हाथ-पैर हिला सकते हैं और न ही बोलने की स्थिति में हैं। परिवार का कहना है कि ऐसी अवस्था में उन्हें एम्बुलेंस से लाने के अतिरिक्त कोई अन्य विकल्प नहीं था।

इसी वार्ड की निवासी आलिमा बीबी भी पक्षाघातग्रस्त हैं और पिछले 30 वर्षों से पालबाड़ी क्षेत्र में रह रही हैं। उनका जन्म भी वर्ष 1960 में हुआ था। वर्ष 2002 की मतदाता सूची में उनका नाम दर्ज है, लेकिन उनके पति के नाम की वर्तनी में त्रुटि पाई गई है। उनकी बहू रुकसाना बीबी ने बताया कि बूथ स्तर के निर्वाचन अधिकारी द्वारा घर पर नोटिस दिए जाने के बाद ही, गंभीर बीमारी के बावजूद, उन्हें सुनवाई केंद्र लाना पड़ा।

परिवार का आरोप है कि घर पर ही सुनवाई कराने के लिए संबंधित अधिकारी को पूर्व में जानकारी दी गई थी, किंतु कोई व्यवस्था नहीं की गई। इसके बाद स्थानीय पार्षद ने एम्बुलेंस की व्यवस्था करवाई और दोनों मतदाताओं को सुनवाई केंद्र तक पहुंचाया।

वहीं, संबंधित मतदान केंद्र की बूथ स्तर की निर्वाचन अधिकारी बबिता सिंह का कहना है कि उनसे फोन पर संपर्क कर यह पूछा गया था कि इन दोनों रोगियों के मामले में क्या किया जाए। उन्होंने आवेदन के साथ चिकित्सकीय प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने की सलाह दी थी, ताकि घर जाकर सुनवाई की जा सके। उनका दावा है कि इसके बावजूद कोई आवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया और दोनों मतदाताओं को सुनवाई केंद्र ले आया गया।

इस विषय में निर्वाचक नामावली पंजीकरण अधिकारी एवं मेदिनीपुर सदर की अनुमंडल अधिकारी मधुमिता मुखर्जी ने स्पष्ट किया कि अस्वस्थ एवं वृद्ध मतदाताओं के लिए घर जाकर सुनवाई की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने बताया कि मंगलवार को ही शहर में चार मतदाताओं के घर जाकर सुनवाई की गई थी। आवेदन प्राप्त होने पर भविष्य में भी घर पर ही सुनवाई कराई जाएगी।

वहीं, सहायक निर्वाचक नामावली पंजीकरण अधिकारी सुकर्णा विश्वास मन्ना ने कहा कि यदि समय रहते सूचना दी जाती, तो दोनों मतदाताओं के घर जाकर ही सुनवाई की जा सकती थी।

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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता