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कोलकाता, 07 जनवरी (हि. स.)। पश्चिम बंगाल में बहुचर्चित नगरपालिकाओं की नौकरी घोटाले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने अपनी अंतिम चार्जशीट में लिखित परीक्षा के दौरान इस्तेमाल की गई ओएमआर शीट में की गई गड़बड़ियों का विस्तृत ब्योरा पेश किया है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने यह अंतिम चार्जशीट पिछले सप्ताह कोलकाता की एक विशेष अदालत में दाखिल की थी।
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, चार्जशीट में बताया गया है कि जिन अयोग्य उम्मीदवारों ने नौकरी पाने के लिए पैसे दिए थे, उनकी ओर से जमा कराई गई खाली ओएमआर शीट को बाद में भरा गया। इस तरह से उत्तर भरकर उन्हें पास होने लायक अंक दिलाए गए। कई मामलों में यह भी सामने आया कि जिन सवालों के उत्तर उम्मीदवारों ने दिए ही नहीं थे, उनसे अधिक अंक उनके खाते में दिखाए गए।
चार्जशीट में यह भी उल्लेख किया गया है कि ओएमआर शीट में हेरफेर करने में एबीएस इन्फोजोन प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी की अहम भूमिका रही। यह कंपनी इस मामले के बिचौलिए अयान शील की है। जांच के दौरान कई नगर निकाय अधिकारी ऐसे जरूरी दस्तावेज नहीं दिखा सके, जिनसे यह साबित हो सके कि ओएमआर शीट को आधिकारिक तौर पर शील से जुड़ी संस्थाओं से संबंधित नगरपालिकाओं को सौंपा गया था।
जांच एजेंसी ने यह भी पाया कि कई ओएमआर शीट पर परीक्षा में शामिल उम्मीदवारों के हस्ताक्षर तक मौजूद नहीं थे। इन तथ्यों के आधार पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने निष्कर्ष निकाला कि लिखित परीक्षा प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर सुनियोजित हेरफेर किया गया।
ओएमआर शीट में हेरफेर से जुड़े ये निष्कर्ष आठ नगरपालिकाओं के क्षेत्रों में छापेमारी और तलाशी अभियानों के दौरान जब्त किए गए अहम दस्तावेजों के आधार पर निकाले गए हैं, जहां भर्ती में अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। अंतिम चार्जशीट में एबीएस इन्फोजोन प्राइवेट लिमिटेड का नाम औपचारिक रूप से शामिल किया गया है।
इस मामले से जुड़ी जानकारी सबसे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को तब मिली थी, जब उसने कुछ वर्ष पहले स्कूल नौकरी घोटाले से जुड़े नकद लेनदेन मामले में अयन शील के ठिकानों पर छापेमारी की थी। बाद में कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने नगरपालिकाओं की भर्ती प्रक्रिया की जांच शुरू की और शील को गिरफ्तार किया गया।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय की समानांतर जांच में अयान शील की ओर से करीब रुपये 100 करोड़ से अधिक की अवैध संपत्ति का भी पता चला है। प्रवर्तन निदेशालय ने पिछले साल अक्टूबर में यह जानकारी दी थी कि अपराध से अर्जित धन को इधर-उधर करने के लिए शेल कंपनियों के इस्तेमाल की भी जांच की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय को नगरपालिकाओं की भर्ती अनियमितताओं से जुड़ी कई कंपनियों के बारे में नई जानकारियां मिली हैं। इसी आधार पर अक्टूबर में उत्तर कोलकाता के बेलियाघाटा सहित कई इलाकों में छापेमारी की गई थी। जांच एजेंसियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे हो सकते हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर