(संशोधन) असम भाजपा के वरिष्ठ नेता कबींद्र पुरकायस्थ का निधन
सिलचर, 07 जनवरी (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री कबींद्र पुरकायस्थ का आज यहां निधन हो गया। वह 95 वर्ष के थे। वह पिछले कुछ समय से बीमार थे और उनका उपचार सिलचर मेडिकल कॉलेज में चल रहा था जहां बुधवार शाम
असम भाजपा के वरिष्ठ नेता कविंद्र पुरकायस्थ का फाइल फोटो


सिलचर, 07 जनवरी (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री कबींद्र पुरकायस्थ का आज यहां निधन हो गया।

वह 95 वर्ष के थे। वह पिछले कुछ समय से बीमार थे और उनका उपचार सिलचर मेडिकल कॉलेज में चल रहा था जहां बुधवार शाम करीब पांच बजे उनका निधन हो गया। लखीमपुर के सांसद प्रधान बरुवा और असम सरकार के शिक्षा मंत्री रनोज पेगुई ने 'एक्स' पर यह जानकारी साझा की।

वरिष्ठ भाजपा नेता के निधन की खबर मिलते ही विभिन्न राजनीतिक नेता-कर्मियों के अलावा शुभचिंतक सिलचर मेडिकल कॉलेज में इकट्ठा हो गए हैं। असम प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं सांसद दिलीप सैकिया ने पुरकायस्थ के निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा, हमारे सभी मार्गदर्शक सम्माननीय कबींद्र पुरकायस्थ का आज परलोक गमन हमारे प्रत्येक दल के कार्यकर्ता को गहरा झटका पहुंचा गया है।

सैकिया ने घोषणा की कि दिवंगत नेता के सम्मान में गुरुवार 8 जनवरी को भाजपा के सभी कार्यक्रम रद्द किये जाते हैं और पार्टी कार्यालय में पार्टी ध्वज को आधा झुका रखा जाएगा।

पुरकायस्थ के निधन पर भाजपा के अलावा अन्य विभिन्न राजनीतिक दलों एवं सामाजिक क्षेत्र में शोक व्यक्त किया गया है।

कबीन्द्र पुरकायस्थ का जन्म 15 दिसंबर 1931 को सिलहट जिले के कमारखाल में हुआ था, जो अब बांग्लादेश में है, और उन्होंने गौहाटी विश्वविद्यालय से एमए की पढ़ाई की थी। वे अटल बिहारी वाजपेयी नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री रहे। राजनीति में कदम रखने से पहले वे एक शिक्षक थे। वह पहली बार 1991 में असम के सिलचर निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा के लिए चुने गए थे । 1998 में वे इसी निर्वाचन क्षेत्र से पुनः निर्वाचित हुए। 2009 में, वे 15वीं लोकसभा के लिए चुने गए, जहां उन्होंने सिलचर से कांग्रेस के संतोष मोहन देव और एयूडीएफ के बदरुद्दीन अजमल जैसे दिग्गज उम्मीदवारों को हराया। लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में, मोदी लहर के बावजूद, उन्हें संतोष मोहन देव की पुत्री सुष्मिता देव (कांग्रेस) से हार का सामना करना पड़ा। सामाजिक जीवन में उनके योगदान के लिए उन्हें सितंबर 2024 में मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया।

हिन्दुस्थान समाचार / सचिन बुधौलिया