आगरमालवाः फाइनेंस बकाया बताकर वसूली करने वाला गिरोह गिरफ्तार
आगरमालवा, 07 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के आगरमालवा में फाइनेंस बकाया बताकर राहगीरों से जबरन वसूली करने वाले एक गिरोह का पुलिस ने बुधवार को खुलासा किया है। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह मोबाइल ऐप का उपयोग कर बाहर
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आगरमालवा, 07 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के आगरमालवा में फाइनेंस बकाया बताकर राहगीरों से जबरन वसूली करने वाले एक गिरोह का पुलिस ने बुधवार को खुलासा किया है। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह मोबाइल ऐप का उपयोग कर बाहर के वाहनों की पहचान करता था और फिर उन्हें रोककर ठगी करता था।

पुलिस के अनुसार, फरियादी करन नरवरिया उम्र 28 वर्ष, निवासी अक्षय नगर, नानाखेड़ा, उज्जैन ने शिकायत दर्ज कराई है। करन अपने दोस्तों दीपक सोनगरा और लक्ष्मणसिंह राठौर के साथ उज्जैन से बगलामुखी माता मंदिर दर्शन के लिए कार क्रमांक एमपी-13-झेडएन-2114 से जा रहे थे। यह कार उनके मित्र लोकेश की थी। कल मंगलवार शाम करीब 4 बजे जब वे बैजनाथ मंदिर जोड़, पर पहुंचे, तभी दो बाइकों पर सवार चार युवकों ने उनकी कार रोक ली। आरोपियों ने कार की चाबी छीन ली और खुद को “सीजर“ बताते हुए कहा कि गाड़ी पर 1 लाख 50 हजार रुपये का फाइनेंस बकाया है। उन्होंने कार छोड़ने के बदले 10 हजार रुपए की मांग की। डर के कारण फरियादी और उसके साथियों ने 6 हजार रुपए नकद और 4 हजार रुपये फोन-पे के जरिए आरोपियों को दिए। आरोपियों ने उन्हें कोई रसीद नहीं दी। उन्होंने अपनी पहचान माखन गुर्जर निवासी ग्राम करवाखेड़ी, अरविंद परमार निवासी ग्राम भादवा, विक्की बंजारिया निवासी तिरुपति कॉलोनी आगरमालवा और फरदीन लाला निवासी ग्राम पचेटी के रूप में बताई। दर्शन कर लौटने के बाद फरियादी ने कार फाइनेंसर से संपर्क किया।

फाइनेंसर ने बताया कि वाहन पर कोई राशि बकाया नहीं है। इसके बाद पीड़ित ने आगरमालवा थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत पर पुलिस ने पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पहले विक्की बंजारिया को गिरफ्तार किया। उसे न्यायालय में पेश कर रिमांड पर लिया गया। विक्की की निशानदेही पर अन्य आरोपियों को भी पकड़ा गया। पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनके खिलाफ अड़ीबाजी तथा जबरन वसूली सहित अन्य धाराओं में प्रकरण दर्ज कर आगे की जांच कर रही है।

इस मामले में आगरमालवा कोतवाली पुलिस थाना प्रभारी शशि उपाध्याय ने बताया कि आरोपियों के पास एक मोबाइल ऐप था, जिसके माध्यम से वे यह पता कर लेते थे कि किन वाहनों पर हायर पर्चेस (फाइनेंस) दर्ज है। इसी आधार पर वे बाहर से आने वाली गाड़ियों को निशाना बनाते थे। पुलिस अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने इससे पहले और किन वाहन मालिकों से इसी तरह अवैध वसूली की है।

हिन्दुस्थान समाचार / रितेश शर्मा