हिसार : गुरुकुल शिक्षा ही भारतीय संस्कृति, संस्कार व राष्ट्रनिर्माण की आधारशिला : लाल बहादुर खोवाल
गुरुकुलों से निकलकर समाज और देश को दिशा दे रहे संस्कारवान ब्रह्मचारी आधुनिक चुनौतियों के बीच गुरुकुल शिक्षा पद्धति ही युवाओं को दिखा रही सही मार्ग हिसार, 07 जनवरी (हि.स.)। गुरुकुल आर्य नगर संस्कृत विद्यापीठ में आयोजित
गुरुकुल में आयोजित कार्यक्रम में ब्रहृमचारियों को सम्मानित करते पदाधिकारी।


गुरुकुलों से निकलकर समाज और देश को दिशा दे रहे

संस्कारवान ब्रह्मचारी

आधुनिक चुनौतियों के बीच गुरुकुल शिक्षा पद्धति

ही युवाओं को दिखा रही सही मार्ग

हिसार, 07 जनवरी (हि.स.)। गुरुकुल आर्य नगर संस्कृत

विद्यापीठ में आयोजित छह दिवसीय शीतकालीन शिविर का समापन बड़े उत्साह, अनुशासन और वैदिक

संस्कृति की गरिमा के साथ सम्पन्न हुआ। शिविर के समापन अवसर पर गुरुकुल के सभी ब्रह्मचारियों

द्वारा योगासन प्रदर्शन, सेल्फ डिफेंस डेमो, पंचिंग डेमो, लाठी डेमो, श्लोकोच्चारण,

देशभक्ति गीत एवं संस्कृत संभाषण का प्रभावशाली प्रदर्शन किया गया। इस अवसर पर जूडो

कोच रोहतास द्वारा ब्रह्मचारियों को आत्मरक्षा की विशेष ट्रेनिंग प्रदान की गई। साथ

ही वार्षिक खेल प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को गुरुकुल

कार्यकारिणी के पदाधिकारियों द्वारा सम्मानित किया गया।

गुरुकुल के मंत्री एडवोकेट लाल बहादुर खोवाल ने

बुधवार काे बताया कि गुरुकुल आर्य नगर संस्कृत विद्यापीठ की स्थापना वर्ष 1964 में की गई थी और

तब से लेकर आज तक इस गुरुकुल से शिक्षित ब्रह्मचारी देश-समाज में विद्वान, राजनेता,

समाजसेवी एवं राष्ट्रसेवक के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, जिससे गुरुकुल

आर्य नगर का नाम देश-विदेश में गौरवान्वित हो रहा है। खोवाल ने बताया कि गुरुकुल शिक्षा

पद्धति भारतीय संस्कृति की रीढ़ है, जहाँ केवल किताबी ज्ञान नहीं बल्कि संस्कार, चरित्र

निर्माण, अनुशासन, राष्ट्रभक्ति, सामाजिक जिम्मेदारी और नैतिक मूल्यों का विकास किया

जाता है। आज के भौतिकवादी युग में गुरुकुल ही ऐसे संस्थान हैं जो युवा पीढ़ी को नशा,

अपराध और कुसंस्कारों से दूर रखते हुए श्रेष्ठ नागरिक बनाने का कार्य कर रहे हैं।

शिविर के दौरान विद्यार्थियों का मार्गदर्शन राम

कुमार आर्य, डॉ. सुदामा शास्त्री (वैदिक प्रवक्ता), श्री जगत पाल जी शास्त्री, आचार्य

सत्यवान शास्त्री, सुरेश कुमार शास्त्री, शैलेंद्र कुमार शास्त्री, अश्वनी शर्मा, सुनील

कुमार, ब्रह्मचारी दीप कुमार सहित अनेक विद्वानों द्वारा किया गया। सभी वक्ताओं ने

छात्रों को महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा बताए गए मार्ग पर चलकर अपने जीवन को

समाज व राष्ट्रहित की सेवा में समर्पित करने का आवाहन किया। मंच संचालन सुरेश कुमार

शास्त्री ने किया।

समापन समारोह में गुरुकुल के मानद कुलपति आचार्य

पंडित रामस्वरूप शास्त्री, कार्यकारी प्रधान श्री रामकुमार आर्य, उप मंत्री रामफल वर्मा,

कंबोज सभा के प्रदेश अध्यक्ष देसराज कंबोज, महेंद्र आर्य, पूर्व डिप्टी डीईओ सत्यव्रत

आर्य, करण शर्मा, रमेश शास्त्री, विनोद सहित अनेक पदाधिकारी, अध्यापक एवं अभिभावक उपस्थित

रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर