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हाथरस, 06 जनवरी (हि.स.)। जनपद में कड़ाके की ठंड से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सोमवार रात तापमान में अचानक गिरावट आने से दर्जनों गांवों में आलू की फसल पर पाला पड़ गया। मंगलवार सुबह खेतों में फसल को पाले की चपेट में देख किसान चिंतित हो गए। इससे आलू के उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका जताई जा रही है।
खेतों में आलू के पत्ते और टहनियां बर्फ की परत से ढकी मिलीं। पाले से फसल को हुए नुकसान की संभावना से किसानों में चिंता है। कुछ किसानों ने समय रहते स्प्रिंकलर और स्प्रे नोजल चलाकर पाले के प्रभाव को कम करने का प्रयास किया। हालांकि, पाले से बचाव के पर्याप्त संसाधनों की कमी के कारण नुकसान की आशंका बढ़ गई है। किसानों ने बताया कि यदि अगले दो-तीन दिनों तक पाला पड़ने की स्थिति बनी रही, तो आलू की पैदावार पर सीधा असर पड़ेगा और पौधों की बढ़वार रुक सकती है। क्षेत्र के किसान अब प्रशासन और कृषि विभाग से मुआवजे के साथ-साथ भविष्य में ऐसे नुकसान को कम करने के लिए तकनीकी सहायता की मांग कर रहे हैं।
कृषि विशेषज्ञ ललित कुलश्रेष्ठ ने किसानों को पाले से बचाव के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में अत्यधिक ठंड और शाम के समय पाला गिर रहा है। आलू की खेती करने वाले किसान शाम को अपने खेतों में हल्का पानी दें, जिससे पाले का असर कम हो सके। साथ ही, दिन में लिक्विड सल्फर का उपयोग करने की सलाह दी गई है।
कृषि उत्पाद कंपनी इंडोफिल के अधिकारी ललित कुलश्रेष्ठ ने बताया कि सैम एक्सोनिल प्लस मैंगोजैब दवा की 600 ग्राम प्रति एकड़ खुराक देने से लेट ब्लाइट रोग का प्रकोप भी नहीं होगा और आलू की फसल स्वस्थ रहेगी। मौसम की मार से परेशान सादाबाद क्षेत्र के किसान आने वाले दिनों को लेकर आशंकित हैं। यदि मौसम में सुधार नहीं हुआ, तो आलू उत्पादकों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मदन मोहन राना