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मऊ , 06 जनवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्षों की साधना और हमारे संतों की प्रेरणा से ही आज देश का हिन्दू संगठित होकर भारत माता की जय और वन्देमातरम् बोलने को तत्पर हुआ है। हमारे पर्वों, त्योहारों को समरस भाव से मनाने लगा है। जननी, जन्मभूमि को अपनी जन्मदायी मां के समान मानने लगा है।
यह विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रांत प्रचारक रमेश ने व्यक्त किए। वे नगर के शीतला माता मंदिर प्रांगण में आयोजित हिंदू सम्मेलन को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समाज परिवर्तन के पांच प्रण सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, सामूहिक परिवार जीवन शैली, स्वदेशी भाव का जागरण, नागरिक कर्त्तव्यों का बोध कराकर पंच परिवर्तन के माध्यम से हिन्दू समाज की जय होगी और विश्व का कल्याण होगा । उन्होंने इस अभियान में शामिल होने के साथ ही सभी से अपनी भूमिका निभाने का भी विनम्र आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि पूरे विश्व में केवल एक ही धर्म है सनातन धर्म । इसके अलावा जितने भी धर्म कहे जाते हैं वह धर्म नहीं बल्कि एक सामान्य पूजा पद्धति है। सनातन वह धर्म है जिसका कभी अंत नहीं है। मानव कल्याण, सृष्टि कल्याण, प्रकृति कल्याण की भावना से ओतप्रोत सनातन ही एकमात्र धर्म है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सनातन धर्मावलंबी ही ऐसे व्यक्ति हैं जो सनातन से भी बड़ा राष्ट्र धर्म का स्थान रखते हैं। जबकि अन्य पूजा पद्धति वाले अपने तथाकथित धर्म के आगे संविधान व राष्ट्र की भावना को नगण्य मानते हैं ल। जबकि सनातन धर्मावलंबी राष्ट्र धर्म सर्वोपरि की भावना से काम करता है।
सम्मेलन में प्रांत कार्यवाह रामविलास, विभाग संघ चालक राम प्रताप, विभाग प्रचारक अंबेश, जिला प्रचारक आर्यम, जिला संघचालक कैलाश, योगेंद्र, जिला कार्यवाह भूवेश, वीरेंद्र, नगर प्रचारक रितेश, नगर कार्यवाह अंबरीश, जिला प्रचार प्रमुख प्रिंस, रिंकू, रवि, राघवेद्र, नगर धर्म जागरण प्रमुख अमित, कार्यक्रम के अध्यक्ष राम प्रसाद शुक्ल, विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष पारसमणी समेत बडी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / वेद नारायण मिश्र