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जयपुर, 06 जनवरी (हि.स.)। जयपुर के जेईसीसी सीतापुरा में आयोजित राजस्थान डिजिफेस्ट के तीसरे दिन मंगलवार को नगरीय विकास एवं आवासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने “आईटी के माध्यम से शहरी शासन की पुनर्कल्पना” विषय पर प्रभावशाली संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के दूरदर्शी नेतृत्व में राजस्थान सरकार तकनीक आधारित, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित शहरी प्रशासन की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रही है।
मंत्री खर्रा ने कहा कि यूनिक प्रॉपर्टी आईडी जैसी पहल से आम नागरिकों को बार-बार केवाईसी कराने की झंझट से मुक्ति मिली है। आधार आधारित ई-केवाईसी और ई-नगर प्रणाली के माध्यम से शहरी सेवाएं अब पूरी तरह डिजिटल हो चुकी हैं, जिससे पहले मैन्युअल प्रक्रियाओं में होने वाली मानवीय त्रुटियों की संभावना लगभग समाप्त हो गई है। उन्होंने बताया कि अब पट्टों से संबंधित कार्यों के लिए नागरिकों को जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं रह गई है।
यूडीएच मंत्री ने जेडीए को प्रदेश के सभी विकास प्राधिकरणों के लिए रोल मॉडल बताते हुए कहा कि जेडीए ने तकनीकी नवाचारों के माध्यम से सुशासन का प्रभावी उदाहरण प्रस्तुत किया है।
निवेश परिदृश्य पर बोलते हुए खर्रा ने कहा कि राजस्थान अब केवल एमओयू साइनिंग राज्य नहीं, बल्कि एमओयू एक्जीक्यूशन राज्य बन चुका है। इसी का परिणाम है कि निवेशकों का राज्य पर विश्वास बढ़ा है। उन्होंने जानकारी दी कि प्रदेश में अब तक 400 से अधिक एमओयू धरातल पर उतर चुके हैं, जिनके माध्यम से 37 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्राप्त हुआ है।
कार्यक्रम के दौरान मंच पर देबाशीष पृष्टी (प्रमुख शासन सचिव, नगरीय विकास एवं आवासन), निशांत जैन (सचिव, जयपुर विकास प्राधिकरण), ललित गोयल (आयुक्त, यूआईटी भीलवाड़ा) और रामजीभाई कलबी (उप आयुक्त, जोधपुर विकास प्राधिकरण) भी उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित