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नई दिल्ली, 06 जनवरी (हि.स.)। उच्चतम न्यायालय ने 27 हजार करोड़ रुपये के मनी लांड्रिंग के मामले में जेल में बंद एमटेक ग्रुप के प्रमोटर अरविंद धाम को जमानत दे दी है। जस्टिस संजय कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत तेजी से न्याय पाने के अधिकार पर अपराध की प्रकृति का असर नहीं डालता है।
कोर्ट ने कहा कि लंबे समय तक विचाराधीन कैदी के रुप में बिना ट्रायल के रखना सजा के समान है। ये ट्रायल के पहले की सजा है। कोर्ट ने कहा कि आर्थिक अपराध की प्रकृति और तथ्य में अंतर हो सकता है, लेकिन ऐसा जमानत न देने की सार्वभौम वजह नहीं हो सकती है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने अभी तक चार्जशीट पर संज्ञान भी नहीं लिया है और अभी दस्तावेज का परीक्षण ही हो रहा है।
अरविंद धाम पर आरोप है कि लोन पर मिले धन को 500 फर्जी कंपनियों के जरिये हेराफेरी को अंजाम दिया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुताबिक एमटेक ग्रुप ने बैंकों से लोन लेने के पहले अपने अचल संपत्तियों और खातों के बारे में गलत जानकारी दी। लोन लेते समय 5000 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति की जानकारी छिपाई गई।
हिन्दुस्थान समाचार/संजय
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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी