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जयपुर, 06 जनवरी (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव और अतिरिक्त स्वास्थ्य सचिव को नोटिस जारी कर पूछा है कि स्वास्थ्य का अधिकार अधिनियम, 2022 को लागू करने के लिए अब तक नियम क्यों नहीं बनाए गए हैं। एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा ने यह आदेश नरेन्द्र कुमार गुप्ता की जनहित याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए।
याचिका में अधिवक्ता प्रेम किशन शर्मा ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार ने स्वास्थ्य का अधिकार अधिनियम, 2022 बनाया है। जिसमें प्रदेश के निवासियों के लिए स्वास्थ्य संबंधी कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। इस कानून को बताए करीब ढाई माह से अधिक का समय बीत चुका है। इसके बावजूद भी इस अधिनियम को लागू करने के लिए अभी तक नियम नहीं बनाए गए हैं। ऐसे में अधिनियम के कल्याणकारी प्रावधानों का लाभ आमजन को नहीं मिल पा रहा है। याचिका में कहा गया कि संबंधित नियमों के अभाव में स्वास्थ्य सेवाओं की न तो सीमा स्पष्ट है और ना ही अस्पताल व प्रशासन की जिम्मेदारी का निर्धारण हो रहा है। याचिका में सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया कि प्रदेश में पचास फीसदी से अधिक मरीज निजी अस्पतालों में इलाज कराते हैं। जिससे उनकी जेब से भारी खर्च होता है। इसके अलावा स्वास्थ्य की लागत से देशभर की करीब सात फीसदी आबादी प्रतिवर्ष गरीबी की ओर जा रही है। प्रदेश में यदि इस अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो आमजन को काफी राहत मिलेगी, जबकि बिना नियम बनाए अधिनियम का उचित क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है। ऐसे में राज्य सरकार को निर्देश दिए जाए कि वह संबंधित नियम बनाए। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / पारीक