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नई दिल्ली, 06 जनवरी (हि.स.)। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि कुपोषण के खिलाफ लड़ाई को एक सामूहिक राष्ट्रीय आंदोलन बनाया जाना चाहिए, जिसमें सरकार, कॉरपोरेट, समुदाय और आम नागरिक सभी की भागीदारी हो। उन्होंने कहा कि कुपोषण का उन्मूलन ‘विकसित भारत’ के निर्माण और देश के दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक भविष्य के लिए अनिवार्य है।
गोयल ने यह बातें राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) द्वारा नई दिल्ली में आयोजित पोषण पर सीएसआर कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) व्यवसाय और सामाजिक प्रभाव को जोड़ने का सशक्त माध्यम है। कानून के तहत सीएसआर पर शुद्ध लाभ का दो प्रतिशत खर्च अनिवार्य है, लेकिन इसे न्यूनतम सीमा के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि अधिकतम सीमा के रूप में। उन्होंने सीएसआर को बोझ नहीं, बल्कि समाज के लिए सार्थक योगदान का अवसर बताया।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सेवा की भावना भारत की संस्कृति और परंपराओं में रची-बसी है और कई संस्थान स्वेच्छा से सामाजिक कार्यों पर निर्धारित सीमा से कहीं अधिक खर्च करते हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा कार्यक्रम सभी हितधारकों के लिए कुपोषण के खिलाफ प्रयास तेज करने का आह्वान है।
पीयूष गोयल ने कहा कि कुपोषण एक जटिल चुनौती है, जिसके समाधान के लिए समन्वित प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम अंतर-मंत्रालयी समन्वय का मजबूत उदाहरण है, जिसमें वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, पशुपालन एवं मत्स्य पालन विभाग, सहकारिता मंत्रालय, पंचायती राज मंत्रालय तथा महिला एवं बाल विकास मंत्रालय प्रधानमंत्री के ‘समग्र सरकार’ (होल-ऑफ-गवर्नमेंट) दृष्टिकोण के तहत मिलकर काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि एनडीडीबी इस पहल में एक छत्र संस्था की भूमिका निभा रहा है, जो सरकार और उद्योग के बीच सहयोग को संभव बना रहा है। पशुपालन और मत्स्य पालन के माध्यम से दूध और मछली जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थों की सुलभता बढ़ाकर कुपोषण से लड़ने में अहम भूमिका निभाई जा सकती है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि गर्भावस्था और प्रारंभिक बाल्यावस्था में उचित पोषण सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि कुपोषण की शुरुआत अक्सर जन्म से पहले ही हो जाती है। उन्होंने कार्यक्रमों की पूर्ण संतृप्ति पर जोर देते हुए कहा कि हर गांव, हर घर और समाज के हर वर्ग तक इनका लाभ पहुंचना चाहिए।
गोयल ने कहा कि सरकार अकेले कुपोषण से नहीं लड़ सकती, इसलिए नवाचार और अभिनव वित्तपोषण की आवश्यकता है। सीएसआर को सीधे पोषण परिणामों से जोड़ने वाला यह कार्यक्रम एक अभिनव मॉडल है, जो समाज और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए साझा मूल्य सृजित करता है। इससे किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ महिलाओं और बच्चों को भी लाभ मिलता है।
उन्होंने कहा कि कुपोषण-मुक्त भारत विकसित राष्ट्र बनने की बुनियाद है। फिट इंडिया, योग, खेल और जल जीवन मिशन जैसे कार्यक्रम भी बेहतर स्वास्थ्य में योगदान देते हैं। उन्होंने कॉरपोरेट जगत से अपील की कि पोषण में निवेश को भारत की भविष्य की कार्यशक्ति और आर्थिक विकास में निवेश के रूप में देखें।
गोयल ने मीडिया से भी आग्रह किया कि वे सीएसआर आधारित पोषण पहलों को उजागर करें और इसे समाज तथा व्यापार दोनों के लिए लाभकारी बताएं। उन्होंने कहा कि कुपोषण के खिलाफ जन आंदोलन की जरूरत है और सीएसआर केवल कंपनियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। व्यक्तिगत अवसरों और उत्सवों को भी समाज सेवा से जोड़ा जा सकता है।
उन्होंने विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयास, नवाचार और समाज की सक्रिय भागीदारी से कुपोषण-मुक्त भारत का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
इस अवसर पर सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर ने कहा कि सीएसआर सामाजिक परिवर्तन का एक प्रभावी साधन बनकर उभरा है, जो परोपकार से आगे बढ़कर रणनीतिक सामाजिक निवेश का रूप ले चुका है। उन्होंने कहा कि ‘शिशु संजीवनी’ जैसे कार्यक्रम यह दर्शाते हैं कि सहकारी ढांचा किस प्रकार स्थानीय भागीदारी, पारदर्शिता और प्रभाव सुनिश्चित करते हुए सीएसआर संसाधनों को ठोस सामाजिक परिणामों में बदल सकता है। उन्होंने एनडीडीबी की ‘गिफ्ट मिल्क’ और ‘शिशु संजीवनी’ पहलों की सराहना करते हुए कहा कि ये कार्यक्रम आकांक्षी जिलों, जनजातीय क्षेत्रों, आंगनवाड़ी केंद्रों और सरकारी स्कूलों पर केंद्रित हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार