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बेतिया, 06 जनवरी (हि.स.)। ग्रामीण विकास के लिए मनरेगा योजना की शुरुआत की गई थी, वह अपने उधर से कोसों दूर रहा है और घोटाले का एक जरिया बन गया था। इस महत्वपूर्ण योजना को सतह पर लाने के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने गहन समीक्षा कर एक नया कानून बनाया है जो काफी सराहनी तथा लाभकारी सिद्ध होगी। उक्त बातें पश्चिम चंपारण के सांसद डॉक्टर संजय जयसवाल ने मीडिया कर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार ने मनरेगा का नाम बदलकर विकसित- भारत रोजगार और आजीविका मिशन की गारंटी याने VB -G RAM G कर दिया है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण रोजगार कार्यक्रमों ने भारत की सामाजिक आर्थिक संरचना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है यह केवल कमजोर परिवारों की आई की सुरक्षा नहीं देते, बल्कि परिसंपत्ति निर्माण ग्राम विकास और सामाजिक स्थिरता के साधन भी हैं। क्योंकि बड़ी संख्या में लोग कृषि और उससे जुड़े कामों पर निर्भर हैं, इसीलिए मौसमी बेरोजगारी और आय में उतार चढ़ाव लगातार चुनौती बने रहते हैं। वर्ष 2006 में लागू महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम ( MGNREGA) ने इस समस्याओं को हल करने और मजदूरी रोजगार की कानूनी गारंटी देने का प्रयास किया।
कार्यक्रम की शुरुआती वर्षों में तेजी से फैला और कई परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की, लेकिन कमजोर प्रशासन भ्रष्टाचार और विकास उन्मुख जिला कौन की कमी के कारण इसका दीर्घकालिक प्रभाव कमजोर रह गया। वृद्धि सेल सुधार की बजाय संरचनात्मक बदलाव की जरूरत को समझते हुए एनडीए सरकार ने विकसित भारत- रोजगार एवं आजीविका मिशन ( ग्रामीण) गारंटी अधिनियम, 2025 (VB-G RAM G अधिनियम, 2025) पेश किया और इस कानून बनाया। यह अधिनियम मनरेगा की जगह लेता है और ग्रामीण रोजगार को सतत विकास का साधन बनता है जो विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप है। दो जायसवाल ने इस कानून की विस्तृत व्याख्या करते हुए इसे अत्यंत महत्वपूर्ण और लाभकारी योजना बताया।
हिन्दुस्थान समाचार / अमानुल हक