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पूर्वी सिंहभूम, 06 जनवरी (हि.स.)। सुरक्षित और सशक्त महिला–सशक्त झारखंड के निर्माण के उद्देश्य से बाल विवाह मुक्त झारखंड अभियान के अंतर्गत मंगलवार को बिरसा मुंडा टाउन हॉल, सिदगोड़ा में जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उप विकास आयुक्त (डीडीसी) नागेंंद्र पासवान ने कहा कि परंपराएं तभी तक सम्मान के योग्य हैं, जब तक वे मानव गरिमा और अधिकारों की रक्षा कर सकें। बाल विवाह न केवल एक सामाजिक कुरीति है, बल्कि एक गंभीर अपराध भी है। उन्होंने बताया कि कानून के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु की लड़की और 21 वर्ष से कम आयु के लड़के का विवाह बाल विवाह की श्रेणी में आता है। इसे रोकने के लिए प्रशासनिक प्रयासों के साथ-साथ समाज की सामूहिक भागीदारी आवश्यक है।
अनुमंडल पदाधिकारी, धालभूम अर्नव मिश्रा ने कहा कि बाल विवाह को लेकर अब तक कई चर्चाएं होती रही हैं, लेकिन अब जरूरत है कि इन चर्चाओं को जमीनी स्तर पर लागू किया जाए। उन्होंने ने कहा कि जिस दिन समाज बाल विवाह की कुरीति के खिलाफ खड़ा हो जाएगा, उसी दिन बाल विवाह में स्वतः कमी आएगी। उन्होंने कहा कि कानून और सरकारी तंत्र अपना दायित्व निभा रहे हैं, लेकिन समाज को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।
जिला समाज कल्याण पदाधिकारी संध्या रानी ने बताया कि राज्य में बाल विवाह की दर 32.2 प्रतिशत है, जो अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह के विरुद्ध सशक्त कार्रवाई के लिए कानून की जानकारी और उसका प्रभावी क्रियान्वयन दोनों जरूरी हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद पाठक