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कृषि वानिकी परियोजना के तहत स्विट्जरलैंड से मिली अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति, बदलते जलवायवीय परिवर्तनों पर होंगे शोध
जोधपुर, 6 जनवरी (हि.स.)। कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर में अब पश्चिमी राजस्थान की पहली हाईटेक सूक्ष्म जीव विज्ञान प्रयोगशाला स्थापित होने जा रही है। इसके लिए विश्वविद्यालय को कृषि वानिकी परियोजना के अंतर्गत स्वीट्जरलैंड से 2.60 करोड रुपये की अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति मिली है। इस हाइटेक लैब में लगातार बदलते जलवायु परिवर्तनों के कारण होने वाले पौधों में बदलाव, मिट्टी के पोषक तत्व, सहित विभिन्न सूक्ष्म जीवों पर शोध किया जायेगा। ये जैव विविधता को बढ़ाने की दिशा में भी अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगा।
कृषि वानिकी परियोजना की प्रधान अन्वेषक डॉ कृष्णा सहारण ने बताया कि कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर को एग्रोफोरेस्ट्री प्रमोशन नेटवर्क, स्विट्जऱलैंड से कृषि वानिकी आधारित शोध के लिए यह स्वीकृति प्राप्त हुई है। यह परियोजना वर्ष 2026 से 2029 तक संचालित की जाएगी। इसके तहत हाईटेक प्रयोगशाला स्थापित की जाएगी। इस लैब में कृषि वानिकी से संबंधित फसल-वृक्ष अंत:क्रिया, भूमि में कार्बन संरक्षण, सहयोगी सूक्ष्मजीवों का अध्ययन, मिट्टी में पोषक तत्वों की स्थिति, जल का ठहराव, जलवायु परिवर्तनों के दौरान पौधों की तनाव सहनशीलता, मिट्टी व पौधों का सूक्ष्मजीवों के माध्यम से प्राकृतिक उपचार जैसे विभिन्न अनुसंधान कार्य किए जायेंगे।
ये अनुसंधान मृदा स्वास्थ्य में सुधार, जैव विविधता संरक्षण, पोषक तत्व चक्रण एवं जल-संसाधनों के कुशल उपयोग में अत्यंत सहायक साबित होंगे। यह परियोजना अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं टिकाऊ कृषि विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक और मील का पत्थर साबित होगी।
सहारण ने बताया कि कृषि वानिकी के दौरान खेत में फसलों के साथ-साथ उपयोगी पेड़ लगाए जाते हैं। इसमें पेड़ और फसल को एक ही जमीन पर वैज्ञानिक तरीके से उगाया जाता है। कृषि वानिकी से मिट्टी में जैविक कार्बन बढ़ता है, लाभकारी सूक्ष्मजीव सक्रिय होते हैं व पानी की बचत होती है। पेड़ वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में मदद करते हैं। इस पद्धति से किसान को फसल के साथ-साथ लकड़ी, फल, चारा एवं औषधीय पौधों से अतिरिक्त आमदनी भी प्राप्त होती है।
कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर के कुलगुरु प्रो. डॉ. वीएस जैतावत ने बताया कि पश्चिमी राजस्थान की शुष्क एवं अर्ध-शुष्क परिस्थितियों में यह प्रोजेक्ट अत्यंत महत्वपूर्ण है। कृषि वानिकी के एडवांस रिसर्च के लिए लैब की स्थापना की जाएगी। इसके तहत वृक्षों एवं फसलों के आपसी संयोजन के दीर्घकालिक प्रभावों का अध्ययन भी किया जाएगा। इसके लिए विश्वविद्यालय को 2.60 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्राप्त हुई है। प्रयोगशाला के माध्यम से वैज्ञानिकों के साथ अन्य विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को भी अनुसंधान का प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। किसानों के लिए भी ये सहायक होगी।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश