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जींद, 06 जनवरी (हि.स.)। जींद से नरवाना तक बिछाई जा रही हाईटेंशन बिजली लाइन का कार्य उचाना में किसानों, कॉलोनीवासियों के विरोध के चलते मंगलवार को दो घंटे तक बाधित रहा। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि बिजली टावरों के लिए तो मुआवजा दिया गया हैए लेकिन तारों के नीचे आने वाली जमीन का मुआवजा बहुत कम तय किया गया है। किसान नेता आजाद पालवां ने बताया कि तारों के नीचे की जमीन के मुआवजे को लेकर संशय बना हुआ था। किसानों और कॉलोनीवासियों ने काम रुकवा कर प्रशासन से स्पष्ट जवाब मांगा।
सूचना मिलने पर एचवीपीएनएल कंस्ट्रक्शन के एसडीओ संजय कुमार और जेई मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया कि तारों के नीचे आने वाली जमीन के लिए कलेक्टर रेट का 30 प्रतिशत मुआवजा दिया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से अपील की कि 30 प्रतिशत मुआवजा बहुत कम है और उन्हें पूरी कीमत दी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि जहां बिजली टावर खड़े किए गए हैं, वहां कलेक्टर रेट का दोगुना मुआवजा दिया जाए। क्योंकि ऐसे स्थानों पर जमीन की कीमत आधी रह जाती है।
आजाद पालवां ने कहा कि 1963 में जब पहली बार बड़ी बिजली लाइनें बिछाई गई थी। तब न तो तारों के नीचे की जमीन का और न ही पोल खड़े करने वाली जगह का कोई मुआवजा दिया गया था। अब सरकार को किसानों के हित में पारदर्शी नीति अपनानी चाहिए। एचवीपीएनएल कंस्ट्रक्शन के एसडीओ संजय कुमार ने बताया कि जींद से नरवाना तक हाईटेंशन लाइन का काम जारी है। पहले यह लाइन रेलिंग पोल पर लगाई गई थी, जिनकी ऊंचाई कम थी। अब नए पोल 250 से 300 मीटर की दूरी पर लगाए जा रहे हैं। जबकि पहले यह दूरी 90 मीटर थी। तारों की ऊंचाई भी बढ़ाकर 60 फीट कर दी गई है। 10 जुलाई 2024 को सरकार ने नई मुआवजा नीति लागू की थी। जिसके तहत जहां पोल खड़े होंगे और जहां से लाइन गुजरेगी वहां मुआवजा दिया जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजेंद्र मराठा