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नई दिल्ली, 06 जनवरी (हि.स.)। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को राजधानी में शास्त्रीय भारतीय भाषाओं में प्रकाशित 55 साहित्यिक कृतियों का लोकार्पण किया। इनमें केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान (सीआईआईएल) के अंतर्गत शास्त्रीय भाषाओं के उत्कृष्टता केंद्रों द्वारा विकसित 41 पुस्तकें तथा केंद्रीय शास्त्रीय तमिल संस्थान (सीआईसीटी) द्वारा प्रकाशित 13 पुस्तकें और एक तिरुक्कुरल की भारतीय सांकेतिक भाषा (इंडियन साइन लैंग्वेज) श्रृंखला शामिल हैं।
इन प्रकाशनों में कन्नड़, तेलुगु, मलयालम, ओड़िया और तमिल भाषाओं से संबंधित महत्वपूर्ण शैक्षणिक और शोधपरक कृतियां सम्मिलित हैं। इसके साथ ही तिरुक्कुरल का भारतीय सांकेतिक भाषा में प्रस्तुतीकरण समावेशी भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। यह प्रयास देश की भाषायी विरासत को शिक्षा और अनुसंधान के केंद्र में लाने तथा सांस्कृतिक गौरव को सुदृढ़ करने की व्यापक राष्ट्रीय पहल का हिस्सा है।
इस अवसर पर अपने संबोधन में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने भारतीय भाषाओं के संवर्धन और संरक्षण के लिए व्यापक कार्य किया है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित सूची में भाषाओं को शामिल करने से लेकर शास्त्रीय ग्रंथों के भारतीय भाषाओं में अनुवाद और मातृभाषा में शिक्षा को प्रोत्साहन देने तक निरंतर प्रयास किए गए हैं। उन्होंने कहा कि अनेक प्रयासों के बावजूद भारतीय भाषाएं समय की कसौटी पर खरी उतरी हैं।
प्रधान ने कहा कि भारत लोकतंत्र की जननी है और भाषायी विविधता इसकी शक्ति है। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि देश की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक धरोहर को संरक्षित किया जाए तथा भावी पीढ़ियों तक पहुंचाया जाए। उन्होंने दोहराया कि सभी भारतीय भाषाएं राष्ट्रीय भाषाएं हैं और ये समाज को जोड़ने का कार्य करती हैं।
उन्होंने कहा कि तिरुक्कुरल का भारतीय सांकेतिक भाषा में समावेशन समावेशी भारत की परिकल्पना को सशक्त करता है, जहां ज्ञान तक सभी की समान पहुंच सुनिश्चित हो। उन्होंने इसे भारत के बौद्धिक साहित्य में एक मूल्यवान योगदान बताया।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारतीय भाषाओं में शिक्षा की दिशा को आगे बढ़ाती है और भारत ‘एकता में विविधता’ का सजीव उदाहरण है। उन्होंने औपनिवेशिक काल की मैकाले मानसिकता का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय सभ्यता ने सदैव भाषाओं को संवाद और सांस्कृतिक सौहार्द के सेतु के रूप में देखा है।
प्रधान ने भारतीय भाषा समिति, उत्कृष्टता केंद्रों, सीआईआईएल और सीआईसीटी को भारतीय भाषाओं के संवर्धन के लिए उनके प्रयासों पर बधाई और शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम में उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी, भारतीय भाषा समिति के अध्यक्ष चामू कृष्ण शास्त्री, सीआईआईएल के निदेशक प्रो. शैलेन्द्र मोहन, सीआईसीटी के निदेशक प्रो. आर. चंद्रशेखरन, सलाहकार (लागत) मनमोहन कौर सहित शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार