कोल माइंस में दुर्घटना रेट 0.93 से घटकर पहुंचा 0.12 तक
धनबाद, 06 जनवरी (हि.स.)। खनन क्षेत्र में बढ़ते टेक्नोलॉजी की रफ़्तार के फलस्वरूप दुर्घटना रेट में कमी आई है। कोल माइंस में होनेवाले दुर्घटनाओं में कमी लाकर डीजीएमएस ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। वर्ष 2047 में विकसित भारत का लक्ष्य पूरा होने तक डी
डीजीएमएस के महा निदेशक


धनबाद, 06 जनवरी (हि.स.)। खनन क्षेत्र में बढ़ते टेक्नोलॉजी की रफ़्तार के फलस्वरूप दुर्घटना रेट में कमी आई है। कोल माइंस में होनेवाले दुर्घटनाओं में कमी लाकर डीजीएमएस ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। वर्ष 2047 में विकसित भारत का लक्ष्य पूरा होने तक डीजीएमएस भी शून्य दुर्घटना का लक्ष्य प्राप्त करने की तैयारी में है।

डीजीएमएस की एक रिपोर्ट के अनुसार एक अच्छी खबर है। कोल माइंस, यानी कोयला खदानों में दुर्घटना दर 0.93 से घटकर 0.12 तक आ गई है, जो सुरक्षा उपायों के सफल क्रियान्वयन और कोयला खदानों में काम करने वाले कर्मियों के लिए एक सुरक्षित और जोखिम-मुक्त वातावरण बनाने के महानिदेशालय के दृष्टिकोण को दर्शाता है। जोकि शून्य दुर्घटना तथा शून्य हार्म के लक्ष्य को पाने के लिए 2047 तक लक्ष्य पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

डीजीएमएस के महानिदेशक उज्जवल ताह ने बताया कि दुर्घटना में कमी आने के पीछे टेक्नोलॉजी का महत्वपूर्ण योगदान है। भारत जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी में आगे बढ़ रहा है वैसे-वैसे देश वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनने की ओर भी अग्रसर है। उन्होंने बताया ये आंकड़े इस बात का संकेत है कि भारत के कोयला खनन क्षेत्र में सुरक्षा के प्रति गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं और सफलता भी मिल रही है। यह डीजीएमएस के संगठनात्मक ढांचे, खान सुरक्षा विधानों और सुरक्षा को बढ़ाने के उपायों का परिणाम है।

उन्होंने बताया न सिर्फ कोल माइंस, बल्कि मेटल खनिजों की खदानों में भी सुरक्षा मानकों में व्यापक सुधार हुए है, जिससे दुर्घटना दर में कमी आई है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार मेटल खनिज की खदानों में दुर्घटना रेट 0.74 से घटकर 0.23 तक पहुंच गया है।

डीजीएमएस का मानना है कि माइंस में दुर्घटना रेट घटने के पीछे न सिर्फ एक टेक्नोलोजी का ही अहम योगदान है, बल्कि साइंटिफिक स्टडी, समय समय पर निगरानी, माइनिंग प्लान, कैटेगरी सुपरविजन इन सभी का भी अहम भूमिका है। बहरहाल, एक उत्साह के साथ डीजीएमएस 7 जनवरी को अपना 125वां स्थापना दिवस मनाने जा रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राहुल कुमार झा