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शिमला, 06 जनवरी (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश के सोलन जिला के मानव भारती विश्वविद्यालय से जुड़े फर्जी डिग्री घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को बड़ी कानूनी सफलता मिली है। शिमला स्थित विशेष पीएमएलए अदालत ने इस मामले में आशोनी कंवर और उनके बेटे मनदीप राणा को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर दिया है। यह आदेश भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (एफईओए), 2018 के तहत ईडी शिमला उप-आंचलिक कार्यालय की ओर से दायर आवेदन पर हुआ है।
ईडी के अनुसार यह कार्रवाई सोलन जिले के धर्मपुर थाना में दर्ज तीन एफआईआर के आधार पर शुरू की गई जांच के बाद की गई है। ये एफआईआर भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई थीं। जांच में सामने आया कि इस घोटाले का मुख्य आरोपी राज कुमार राणा है। उसने अपनी पत्नी आशोनी कंवर और बेटे मनदीप राणा सहित अन्य सहयोगियों की मदद से एजेंटों और छात्रों से पैसे लेकर फर्जी डिग्रियां बेचीं।
ईडी की जांच में यह भी पाया गया कि ये फर्जी डिग्रियां मानव भारती विश्वविद्यालय सोलन के नाम पर जारी की गईं। इस अवैध गतिविधि से करीब 387 करोड़ रुपये की अपराध से जुड़ी आय अर्जित की गई। एजेंसी के मुताबिक इस पैसे का इस्तेमाल राज कुमार राणा, आशोनी कंवर और मनदीप राणा ने अपने नाम पर और उनसे जुड़ी संस्थाओं के नाम पर देश के विभिन्न राज्यों में चल और अचल संपत्तियां खरीदने में किया।
ईडी ने इस मामले में अब तक करीब 200 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की है। इन कुर्क की गई संपत्तियों की पुष्टि पीएमएलए के तहत नियुक्त माननीय न्यायनिर्णायक प्राधिकारी ने भी कर दी है। इससे पहले भी ईडी ने इस घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पीएमएलए, 2002 के तहत शिमला की विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल की थी।
इस अभियोजन शिकायत में राज कुमार राणा, आशोनी कंवर, मनदीप राणा समेत कुल 14 लोगों और दो संस्थाओं को आरोपी बनाया गया था। विशेष अदालत ने 4 जनवरी 2023 को इस शिकायत पर संज्ञान लेते हुए आशोनी कंवर और मनदीप राणा को समन जारी किए थे, लेकिन दोनों ने अदालत के समन का पालन नहीं किया। इसके बाद अदालत ने 4 नवंबर 2023 को उनके खिलाफ खुले गैर-जमानती वारंट जारी किए।
ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि मानव भारती विश्वविद्यालय के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद आशोनी कंवर और मनदीप राणा देश छोड़कर चले गए थे। दोनों इस समय ऑस्ट्रेलिया में रह रहे हैं। जांच में शामिल होने के लिए उन्हें कई बार समन भेजे गए, लेकिन वे कभी भी ईडी के सामने पेश नहीं हुए। एजेंसी का कहना है कि दोनों को भारत वापस लाने के लिए हर संभव प्रयास किए गए, लेकिन उन्होंने आपराधिक मुकदमे का सामना करने के लिए भारत लौटने से साफ इनकार कर दिया।
इन्हीं तथ्यों के आधार पर ईडी ने एफईओए, 2018 की धारा 4 के तहत विशेष अदालत में आवेदन दायर कर आशोनी कंवर और मनदीप राणा को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने की मांग की थी। विशेष पीएमएलए अदालत शिमला ने अपने आदेश में इस आवेदन को स्वीकार कर लिया।
ईडी का कहना है कि इस मामले में आगे की जांच अभी जारी है और घोटाले से जुड़ी अन्य संपत्तियों और लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा