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कोलकाता, 06 जनवरी (हि.स.)। आदिवासियों को अवैध रूप से अनुसूचित जनजाति (एसटी) सूची में शामिल करने की कथित साजिश के खिलाफ तथा फर्जी एसटी प्रमाणपत्रों को निरस्त करने हेतु जांच आयोग के गठन की मांग को लेकर मंगलवार को कोलकाता के ऐतिहासिक रानी रासमणि रोड पर एक विशाल आदिवासी जनसभा आयोजित किया गया। इस आंदोलन का आह्वान यूनाइटेड फोरम ऑफ ऑल आदिवासी ऑर्गेनाइजेशंस (यूएफएएओ) ने किया था।
जनसभा में राज्य के विभिन्न जिलों से दलबल के साथ आदिवासी समाज के लोग उपस्थित हुए। प्रदर्शनकारियों ने राज्यभर में लगातार घट रही आदिवासी महिलाओं के साथ बलात्कार, हत्या एवं शीलभंग की घटनाओं का तीव्र विरोध दर्ज कराया। उन्होंने वनाधिकार कानून–2006 को सही एवं पूर्ण रूप से लागू करने की मांग की।
आदिवासी बहुल इलाकों में बंद पड़े छात्रावासों को पुनः चालू करने, वहां पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति करने तथा शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की भी मांग उठाई गई।
वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज अपने संवैधानिक अधिकारों से वंचित किया जा रहा है और यह आंदोलन केवल अधिकारों का नहीं, बल्कि अस्तित्व और सम्मान की रक्षा की लड़ाई है।
यूएफएएओ के नेताओं ने कहा कि फर्जी तरीके से एसटी सूची में नाम जोड़ने से वास्तविक आदिवासियों के हक पर आघात हो रहा है। इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए तत्काल जांच आयोग गठित किया जाना चाहिए।
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक प्रदर्शन या रैली नहीं, बल्कि एकजुट आदिवासी समाज की निर्णायक आवाज है। यह दूसरी जनसभा है और यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और व्यापक तथा तेज किया जाएगा।
हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता