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धमतरी, 05 जनवरी (हि.स.)।धान कटाई के बाद खेतों में फैली पराली अब किसानों के लिए बोझ नहीं, बल्कि उपयोगी संसाधन बनती जा रही है। इन दिनों पराली को बेलन मशीन की मदद से गांठों में बदला जा रहा है, जिससे किसान इसे पशुओं के चारे के रूप में सुरक्षित रख रहे हैं। वहीं कई किसान पराली की गांठें बेचकर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रहे हैं।
पहले जहां कटाई के बाद खेतों में पड़ी पराली को जलाने की प्रवृत्ति आम थी, वहीं अब जागरूकता और तकनीक के चलते किसान पराली का बेहतर उपयोग कर रहे हैं। बेलन मशीन से पराली को सघन रूप में गांठ बनाकर आसानी से संग्रहित किया जा सकता है, जिससे पशुओं के लिए वर्षभर चारे की व्यवस्था सुनिश्चित होती है। भखारा ब्लाक के ग्राम सुपेला में इसका प्रत्यक्ष उदाहरण देखने को मिल रहा है। यहां सड़क किनारे स्थित खेतों में बड़ी संख्या में पराली की गांठें रखी हुई हैं।
कटाई के बाद खेतों से एकत्रित पराली को बेलन मशीन से गांठ बनाकर सड़क किनारे सहेजकर रखा गया है, ताकि आवश्यकता अनुसार इसका उपयोग या विक्रय किया जा सके। किसान जोहरराम साहू, बैसाखूराम देवांगन सहित अन्य किसानों का कहना है कि पराली की गांठें पशुपालकों के लिए उपयोगी साबित हो रही हैं, जिससे इसकी मांग भी बढ़ रही है। इससे न केवल किसानों को अतिरिक्त आमदनी हो रही है, बल्कि पराली जलाने से होने वाले पर्यावरण प्रदूषण में भी कमी आ रही है।
कृषि विशेषज्ञ डा शक्ति वर्मा के अनुसार पराली का इस तरह उपयोग करना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। इससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और वायु प्रदूषण पर भी अंकुश लगता है। पराली प्रबंधन की यह पहल क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रही है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा