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यरुशलम, 05 जनवरी (हि.स)। भारत और इजराइल के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों और प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की चर्चाओं के बीच एक बड़ा वित्तीय सुधार दिख रहा है। इजराइल में उपस्थित एकमात्र भारतीय ऋणदाता स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) रुपये में द्विपक्षीय व्यापार को सुविधाजनक बनाने की कोशिश कर रहा है।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया इजराइल के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) वी. मणिवन्नन ने आधिकारिक बयान में कहा, भारत के अपने साझेदार देशों के साथ रुपये में व्यापार करने की बढ़ती रुचि को देखते हुए हमारे बैंकिंग नियामक भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों को अपने कॉर्पोरेट ग्राहकों के निर्यात और आयात के निपटान को रुपये में करने की अनुमति दी है।
मणिवन्नन ने बताया कि इजराइल को इस तंत्र के तहत साझेदार देशों में से एक के रूप में पहचाना गया है। यह तंत्र 'स्पेशल रुपया वोस्ट्रो अकाउंट' (एसआरवीए) के जरिए काम करेगा, जिससे इजराइल कंपनियां सीधे रुपये में भुगतान कर सकेंगी और उसे हासिल कर सकेंगी। यह कदम न केवल भारतीय मुद्रा के अंतरराष्ट्रीयकरण के सरकार के लक्ष्य के अनुरूप है, बल्कि इससे दोनों देशों के आयातकों और निर्यातकों के लिए विनिमय दर का जोखिम भी कम होगा।
एसबीआई ने 2007 में इजराइल में अपनी शाखा खोली और तब से एक पूर्ण विकसित परिचालन बनाए रखने में सफल रहा है। यह वैश्विक महामारी तथा क्षेत्र में जारी युद्ध के कारण दो वर्ष से अधिक समय तक चली उथल-पुथल के बावजूद इसकी दृढ़ता को दर्शाता है। स्टेट बैंक इजराइल में मौजूद एकमात्र भारतीय बैंक है, जो अब द्विपक्षीय व्यापार को रुपये (आईएनआर) में सुविधाजनक बनाने की दिशा में तेजी से कदम उठा रहा है।
उल्लेखनीय है कि भारतीय मुद्रा रुपये में व्यापार को बढ़ावा देने का यह प्रयास ऐसे समय में हो रहा है, जब दोनों देश आर्थिक सहयोग की पूरी क्षमता का लाभ उठाने के लिए प्रयासरत हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की नवंबर में इजराइल की यात्रा के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दिसंबर में इजराइल का दौरा किया था।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर