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नई दिल्ली, 05 जनवरी (हि.स.)। भारतीय रेल चालू वित्त वर्ष 2025-26 में तेज, सुरक्षित और किफायती रेल सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर प्रगति कर रही है। आधुनिक और कनेक्टेड भारत के विजन के अनुरूप भविष्य के लिए तैयार संगठन के रूप में खुद को रूपांतरित करते हुए भारतीय रेल ने पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) के उपयोग में मजबूत प्रदर्शन किया है।
रेल मंत्रालय के अनुसार, दिसंबर 2025 के अंत तक भारतीय रेल ने कुल सकल बजटीय सहायता (जीबीएस) 2,52,200 करोड़ रुपये में से 2,03,138 करोड़ रुपये यानी 80.54 प्रतिशत का उपयोग कर लिया है। यह दिसंबर 2024 की समान अवधि की तुलना में जीबीएस उपयोग में 6.54 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। यह व्यय मुख्य रूप से सुरक्षा उपायों, क्षमता संवर्धन, बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण और यात्री सुविधाओं पर केंद्रित रहा है।
सुरक्षा से जुड़े कार्यों में आवंटित राशि का 84 प्रतिशत उपयोग किया गया है। क्षमता वृद्धि के लिए 1,09,238 करोड़ रुपये के आवंटन में से 76,048 करोड़ रुपये (लगभग 69 प्रतिशत) खर्च किए जा चुके हैं। वहीं, यात्री सुविधाओं के क्षेत्र में दिसंबर 2025 तक 9,575 करोड़ रुपये व्यय के साथ 80 प्रतिशत उपयोग दर्ज किया गया है।
पिछले एक दशक में निरंतर कैपेक्स के सकारात्मक परिणाम स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। देशभर में 164 वंदे भारत ट्रेन सेवाएं, 30 अमृत भारत ट्रेन सेवाएं शुरू की जा चुकी हैं। इसके अलावा, कवच स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली का कार्यान्वयन, ब्रॉडगेज नेटवर्क का 99 प्रतिशत से अधिक विद्युतीकरण, नई रेल लाइनों, गेज परिवर्तन, ट्रैक दोहरीकरण, ट्रैफिक सुविधाओं, पीएसयू निवेश और मेट्रोपॉलिटन परिवहन प्रणालियों से जुड़े व्यापक कार्य किए गए हैं।
इन पहलों से रेल सेवाओं की गति, सुरक्षा और यात्रियों की सुविधा में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जबकि किराया किफायती बना हुआ है। शीघ्र ही वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के उद्घाटन के साथ लंबी दूरी की रेल यात्रा में भी बड़ा परिवर्तन आने की उम्मीद है।
रेल मंत्रालय ने कहा कि इन रुझानों से स्पष्ट है कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए निर्धारित जीबीएस व्यय योजना सही दिशा में है और बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्य तेजी से पूरे किए जा रहे हैं। मंत्रालय को भरोसा है कि चालू वित्त वर्ष के सभी लक्ष्य समय पर हासिल कर लिए जाएंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार