पार्षद से अभद्रता पड़ी भारी: कटनी नगर निगम के उपयंत्री शैलेन्द्र प्यासी निलंबित
कटनी, 05 जनवरी (हि.स.)। मप्र के कटनी नगर निगम में अनुशासनहीनता का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। बीते 24 दिसंबर 2025 को आयोजित लोक निर्माण एवं उद्यान समिति की बैठक के दौरान वरिष्ठ पार्षद एवं समिति सदस्य मिथिलेश जैन से अभद्र व
पार्षद से अभद्रता पड़ी भारी: कटनी नगर निगम के उपयंत्री शैलेन्द्र प्यासी निलंबित


कटनी, 05 जनवरी (हि.स.)। मप्र के कटनी नगर निगम में अनुशासनहीनता का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। बीते 24 दिसंबर 2025 को आयोजित लोक निर्माण एवं उद्यान समिति की बैठक के दौरान वरिष्ठ पार्षद एवं समिति सदस्य मिथिलेश जैन से अभद्र व्यवहार करना नगर निगम के उपयंत्री शैलेन्द्र प्यासी को महंगा पड़ गया। नगर निगम आयुक्त तपस्या परिहार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उपयंत्री को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के आदेश जारी किए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 24 दिसंबर को हुई समिति की बैठक के दौरान उपयंत्री शैलेन्द्र प्यासी ने सार्वजनिक रूप से तेज आवाज में बातचीत करते हुए वरिष्ठ पार्षद मिथिलेश जैन के प्रति अभद्रता की थी। बैठक में मौजूद सदस्यों के समक्ष हुए इस व्यवहार को न केवल अनुचित बल्कि सेवा आचरण के विरुद्ध माना गया। मामला सामने आने के बाद नगर निगम प्रशासन ने उपयंत्री के इस कृत्य को अनुशासनहीनता की श्रेणी में रखा।

घटना के बाद उपयंत्री शैलेन्द्र प्यासी को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया था। उपयंत्री द्वारा प्रस्तुत किया गया जवाब नगर निगम आयुक्त तपस्या परिहार को संतोषजनक नहीं लगा। इसके बाद आयुक्त ने सेवा नियमों के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें दोषी ठहराया।

नगर निगम आयुक्त द्वारा जारी आदेश के अनुसार, उपयंत्री शैलेन्द्र प्यासी को मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 3 (1) एवं (2) का उल्लंघन करने का दोषी पाया गया है। इसके आधार पर मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1968 के नियम 9 (2) (क) के अंतर्गत उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।

निलंबन अवधि के दौरान उपयंत्री शैलेन्द्र प्यासी को सुरम्य पार्क, नगर पालिक निगम कटनी में संबद्ध किया गया है। साथ ही निलंबन काल में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। इस कार्रवाई के बाद नगर निगम में यह संदेश स्पष्ट रूप से गया है कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के प्रति अमर्यादित व्यवहार और कार्यस्थल पर अनुशासनहीनता किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, नगर निगम आयुक्त द्वारा की गई यह कार्रवाई कार्यसंस्कृति और मर्यादा बनाए रखने की दिशा में एक सख्त और अनुकरणीय कदम माना जा रहा है। नगर निगम के गलियारों में इस निर्णय को लेकर चर्चा बनी हुई है और इसे कर्मचारियों के लिए एक स्पष्ट चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है कि नियमों और आचरण का उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई तय है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश चतुर्वेदी