परमहंस योगानंद की 133वीं जयंती पर आयोजित आध्यात्मिक कार्यक्रम में शामिल हुए हजारों श्रद्धालु
रांची, 05 जनवरी (हि.स.)। योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इंडिया (वाईएसएस), रांची की ओर से अपने संस्थापक श्री श्री परमहंस योगानन्दजी की 133वीं जयंती सोमवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई। चुटिया स्थित योगदा आश्रम में आयोजित समारोह की शुरुआत विशेष समूह
परमहंस योगानन्दजी की जयंति पर प्रार्थना करते भक्‍त


परमहंस योगानन्दजी की जयंति पर भजन में लीन श्रद्धालु


रांची, 05 जनवरी (हि.स.)। योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इंडिया (वाईएसएस), रांची की ओर से अपने संस्थापक श्री श्री परमहंस योगानन्दजी की 133वीं जयंती सोमवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई। चुटिया स्थित योगदा आश्रम में आयोजित समारोह की शुरुआत विशेष समूह ध्यान से हुई, जिसके बाद स्वामी श्रद्धानन्द गिरि ने “गुरु: मौन ईश्वर की मुखर वाणी” विषय पर सत्संग किया।

इस अवसर पर कार्यक्रम का सीधा प्रसारण योगदा सत्संग ऑनलाइन ध्यान केंद्र के माध्यम से जूम ऐप पर किया गया, जिसमें देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु जुड़े। इसके पश्चात ब्रह्मचारी भास्करानन्द और कैवल्यानन्द के संचालन में भजनों का उल्लासपूर्ण कीर्तन हुआ। कार्यक्रम के क्रम में शिव मंदिर में गुरु पूजा और यज्ञ का आयोजन भी किया गया। वहीं, आश्रम परिसर में भक्तों तथा रांची व आसपास के गांवों से पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए भंडारे की व्यवस्था की गई। समारोह का समापन विशेष ध्यान के साथ किया गया।

भंडारे में हजारों भक्तों ने पाया गुरु प्रसाद

दरअसल, श्री श्री परमहंस योगानन्द द्वारा स्थापित इस आध्यात्मिक संस्था की परंपरा के अनुसार हर वर्ष उनके जन्मोत्सव को ध्यान, कीर्तन और भंडारे के साथ मनाया जाता है। जयंती के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु कार्यक्रम में शामिल हुए। आश्रम के द्वार पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं, जो भीतर विशाल मैदान तक पहुंचीं। यहां वाईएसएस के सेवकों और भक्तों ने खिचड़ी, चटनी और लड्डू के रूप में गुरु प्रसाद वितरित किया। भंडारे के माध्यम से हजारों लोगों को गुरु प्रसाद कराया गया।

सेवा गतिविधियों के अंतर्गत दिसंबर 2025 में आश्रम की ओर से गुरुदेव के सम्मान में विभिन्न सेवा कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें अंगड़ा गांव के गरीब और जरूरतमंद निवासियों तथा रांची में कुष्ठ रोग से प्रभावित कॉलोनी (निर्मल आवास, मुदमा के पास) के लोगों को कंबल वितरित किए गए। वहीं 2 जनवरी 2026 को भी आश्रम द्वारा कुष्ठ रोग से प्रभावित कॉलोनी के जरूरतमंद लोगों को भोजन उपलब्ध कराकर सेवा कार्य जारी रखा गया।

उल्लेखनीय है कि योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इंडिया की स्थापना श्री श्री परमहंस योगानन्दजी ने वर्ष 1917 में भारत और पड़ोसी देशों में क्रियायोग की सार्वभौमिक शिक्षाओं के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से की थी। क्रियायोग एक प्राचीन आध्यात्मिक विज्ञान है, जिसकी उत्पत्ति सहस्राब्दियों पूर्व भारत में मानी जाती है।---------

हिन्दुस्थान समाचार / Vinod Pathak