Enter your Email Address to subscribe to our newsletters

रांची, 05 जनवरी (हि.स.)। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा है कि हेमंत सोरेन सरकार द्वारा पेसा कानून 1996 की नियमावली लागू किए जाने से गांवों के मानकी, पाहान, मुंडा, मांझी और महतो सशक्त हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी वजह से बालू–गिट्टी के सुनियोजित माफिया तंत्र और उनसे जुड़े भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लोग बेचैन हैं तथा पेसा कानून का विरोध कर रहे हैं।
सोमवार को मोर्चा के केंद्रीय कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए भट्टाचार्य ने कहा कि दो बार आदिवासी मामलों के केंद्रीय मंत्री रहे अर्जुन मुंडा और उनके भाजपा सहयोगी आज पेसा पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि अपने लंबे कार्यकाल में उन्होंने इसे लागू करने के लिए कोई पहल नहीं की। उन्होंने कहा कि भाजपा की आलोचना पर किसी मानकी, मुंडा या पाहान ने प्रतिक्रिया नहीं दी, क्योंकि वे जानते हैं कि झामुमो सरकार ने ही उन्हें शोषण से मुक्ति दिलाई है।
भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि पेसा कानून का विरोध करने वाले वही लोग हैं, जो गांवों में महाजनी प्रथा, वन उपज की लूट और बालू–गिट्टी के अवैध कारोबार के संरक्षक रहे हैं। उन्होंने कहा कि पेसा लागू होने से अब ग्राम सभा को अपनी नीतियां और राजस्व तय करने का अधिकार मिलेगा, जिससे इन तत्वों की आर्थिक रीढ़ टूटेगी।
उन्होंने कहा कि तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में पहले ही पेसा कानून लागू किया जा चुका है, जबकि भाजपा के शासनकाल में न तो पेसा लागू हुआ और न ही आदिवासी हितों की रक्षा की गई। इसके विपरीत सीएनटी–एसपीटी कानूनों से छेड़छाड़ और पुलिस फायरिंग जैसी घटनाएं सामने आईं।
सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि अब वह दौर समाप्त हो गया है जब दबाव बनाकर माइनिंग लीज दी जाती थी या जंगलों की अंधाधुंध कटाई होती थी। अब ग्राम सभा तय करेगी कि खनन होगा या नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पेसा नियमावली में परंपरा और ग्राम सभा की सर्वोच्चता पूरी तरह सुरक्षित है और हेमंत सोरेन सरकार ने झारखंड को शोषण मुक्त बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है।-------------
हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar