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मुजफ्फरपुर, 05 जनवरी (हि.स.)। बिहार में वैशाली जिले के लालगंज थाना क्षेत्र में एक चौंकाने वाले मामले में, तिरहुत रेंज के पुलिस उप-महानिरीक्षक (डीआईजी) चंदन कुमार कुशवाहा ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लालगंज के थानाध्यक्ष संतोष कुमार और छापेमारी दल में शामिल अन्य पुलिस पदाधिकारियों/कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कर अनुसंधान शुरू करने का निर्देश दिया है।
क्या है पूरा मामला
गत 30 दिसंबर 2025 को लालगंज थाना अंतर्गत विलनपुर गांव निवासी रामप्रीत सहनी के घर चोरी के सामानों की बरामदगी को लेकर छापेमारी की गई थी। छापेमारी के दौरान पुलिस ने कुछ सामान, तीन टीवी सेट, दो जिंदा कारतूस, एक मिसफायर कारतूस और तांबे के बर्तन आदि जब्त किए। हालांकि, परिवार के सदस्यों और स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने लाखों रुपये के सोने-चांदी के आभूषण और बड़ी मात्रा में नकदी भी बरामद की, लेकिन इसे आधिकारिक जब्ती सूची में नहीं दिखाया और गायब कर दिया।
जांच और कार्रवाई
शिकायत मिलने के बाद, वैशाली के पुलिस अधीक्षक (एसपी) ललित मोहन शर्मा ने मामले की जांच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (यातायात) प्रेम सागर से कराई। जांच में पाया गया कि छापेमारी के दौरान प्रचलित कानूनी प्रावधानों और विभागीय निर्देशों का पालन नहीं किया गया। विशेष रूप से, अनिवार्य वीडियोग्राफी नहीं की गई और बरामद नकदी व सोने को जब्ती सूची में सही से अंकित नहीं किया गया। जांच रिपोर्ट के आधार पर, एसपी ने डीआईजी चंदन कुशवाहा से कार्रवाई की सिफारिश की। आरोपों को प्रथम दृष्टया सही पाते हुए, डीआईजी के निर्देश पर थानाध्यक्ष संतोष कुमार और अवर निरीक्षक (एसआई) सुमन जी झा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था।
डीआईजी का सख्त रुख
आज दिनांक 5 जनवरी 2026 को, डीआईजी चंदन कुमार कुशवाहा ने स्वयं एसपी वैशाली, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी और अन्य वरीय पुलिस अधिकारियों के साथ विलनपुर गांव पहुंचकर घटनास्थल का मुआयना किया और स्थानीय लोगों से पूछताछ की। साक्ष्य मिलने के बाद, उन्होंने थानाध्यक्ष संतोष कुमार और शामिल अन्य दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। डीआईजी इस मामले की स्वयं निगरानी कर रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी