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पुरुलिया, 05 जनवरी (हि.स.)। सप्ताह के पहले दिन सोमवार को पुरुलिया जिले के हुर्रा अंतर्गत राकाब जंगल में चीतल हिरण की मौजूदगी सामने आने से वन विभाग में खुशी की लहर है। कंसाबती (उत्तर) वन विभाग के अधीन राकाब जंगल के भीतर सोमवार को दो चीतल हिरण (स्पॉटेड डियर) की गतिविधियां देखी गईं, जिससे क्षेत्र में लंबे समय बाद वन्यजीवन की वापसी के संकेत मिले हैं।
वन विभाग के अनुसार, ये हिरण कभी जंगल के भीतर अकेले तो कभी बकरियों के झुंड के साथ घूमते नजर आए। सोमवार को कंसाबती नदी के किनारे भी दोनों हिरणों को दौड़ते हुए देखा गया।
हुर्रा रेंज के रेंजर संजय पति ने बताया कि नदी के जलप्रवाह के साथ बहकर ये हिरण इस जंगल क्षेत्र तक पहुंचे होंगे। दोनों में एक हिरण आकार में बड़ा है, जबकि दूसरा छोटा है। संयुक्त वन प्रबंधन समिति के सहयोग से इलाके में नियमित निगरानी रखी जा रही है।
इसी बीच रविवार को कोटशिला-झालदा वनांचल में श्लॉथ भालुओं की मौजूदगी को लेकर भी वन विभाग को सकारात्मक संकेत मिले हैं। ट्रैप कैमरों में पहले से कैद तस्वीरों के विश्लेषण से स्पष्ट हुआ है कि इस क्षेत्र में कई श्लॉथ भालू स्थायी रूप से विचरण कर रहे हैं।
पुरुलिया वन विभाग के डीएफओ अंजन गुहा ने बताया कि उच्चाधिकारियों की अनुमति मिलने के बाद भालुओं की गणना का कार्य शुरू किया जाएगा।
कंसाबती (उत्तर) वन विभाग के डीएफओ मुदित कुमार ने कहा कि राकाब जंगल में हिरणों की संख्या का आकलन करने के लिए विस्तृत सर्वे कराया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि कोटशिला, झालदा, आड़सा और बांदोवान क्षेत्रों में पहले से हिरणों की मौजूदगी रही है, लेकिन राकाब जंगल में सोमवार को उनकी पुष्टि पहली बार हुई है। इससे आसपास के गांवों—बाघाटांड़, सिजू, माखना, कारुडुबा और राहामदा—के ग्रामीणों में उत्साह देखा जा रहा है।
वन अधिकारियों का कहना है कि जंगल की घनता बढ़ने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के कारण ही यह सकारात्मक तस्वीर सामने आई है। हालांकि, बड़े वन्यजीवों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय लोगों में सतर्कता भी बढ़ाई जा रही है।
वन्यजीवों की वापसी से पर्यटन क्षेत्र भी उत्साहित है और आने वाले दिनों में पुरुलिया के वन क्षेत्र पर्यटकों के लिए और आकर्षक बन सकते हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता