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औरैया, 04 जनवरी (हि. स.)। उत्तर प्रदेश के औरैया इटावा जिले में चंबल सेंचुरी क्षेत्र में सर्दी का मौसम शुरू होते ही पंचनद और भरेह संगम विदेशी पक्षियों की चहचहाहट से गुलजार हो गया है। हजारों किलोमीटर लंबा सफर तय कर सायबेरिया, रूस और मलेशिया से आने वाले ये प्रवासी पक्षी हर साल सर्दियों में यहां डेरा डालते हैं। जैसे ही ठंड बढ़ती है, वैसे ही इन सुंदर और रंग-बिरंगे पक्षियों का आगमन शुरू हो जाता है, जिससे संगम तट का प्राकृतिक सौंदर्य और भी निखर उठता है।
स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए इन विदेशी मेहमानों का कलरव आकर्षण का मुख्य केंद्र बना हुआ है। पंचनद और भरेह संगम पर सुबह-शाम पक्षियों के झुंड उड़ान भरते और जल में विचरण करते दिखाई देते हैं। बताया जाता है कि अपने मूल देशों में कड़ाके की ठंड और बर्फबारी शुरू होते ही इन पक्षियों के लिए भोजन और प्रजनन कठिन हो जाता है। ऐसे में चंबल सेंचुरी की नम भूमि, जलाशय और खुला वातावरण इनके लिए बेहद अनुकूल साबित होता है।
विदेशी पक्षियों के आगमन को देखते हुए सेंचुरी विभाग ने सुरक्षा और निगरानी भी बढ़ा दी है।
सेंचुरी दरोगा प्रताप सिंह वर्मा, वीट प्रभारी रोहित सिंह यादव तथा नाविक अजय कुमार की टीम दिन-रात गश्त कर रही है। विशेष रूप से रात के समय पेट्रोलिंग की जा रही है, ताकि किसी शिकारी या जंगली जानवर द्वारा पक्षियों को कोई नुकसान न पहुंचाया जा सके। विभागीय कर्मचारी लगातार कांबिंग कर रहे हैं, जिससे अंडों और नवजात पक्षियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
दिसंबर के मध्य से फरवरी के अंत तक भरेह संगम, पंचनद संगम और आसपास के सेंचुरी क्षेत्रों में इन पक्षियों की भरमार देखने को मिलती है। यह समय इनके प्रजनन के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। इसी दौरान मादा पक्षी अंडे देती हैं और फरवरी-मार्च तक बच्चे निकल आते हैं। बच्चों के उड़ान भरने योग्य होते ही ये पक्षी धीरे-धीरे अपने वतन की ओर लौट जाते हैं।
चंबल सेंचुरी के विभिन्न इलाकों जैसे भरेह संगम, बबाईन पुल, पंचनद संगम, पथर्रा, छिबरौली, पालीघार, सहसों और बरचोली क्षेत्र में भी प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी दर्ज की गई है।
रेंजर कोटेश त्यागी ने बताया कि रूस, सायबेरिया और मलेशिया से करीब 12 हजार किलोमीटर का सफर तय कर ये पक्षी यहां पहुंचते हैं। एक माह से अधिक समय की लंबी यात्रा के बाद संगम क्षेत्र में पहुंचकर ये अपना ठिकाना बनाते हैं।
यहां आने वाले प्रमुख पक्षियों में रूडी शेलडक, पेंटेड स्टॉर्क, विसलिंग टील, ब्लैक आइबिस, बार-हेडेड गूज, ब्लैक नेक्ड स्टॉर्क, प्लेसिस गल, टेल टिंगो और कार्मोरेंट आदि शामिल हैं। रेंजर के अनुसार सभी प्रवासी पक्षी दिसंबर माह तक पहुंच जाते हैं और पूरी सर्दी यहीं प्रवास करते हैं। गर्मी का मौसम शुरू होते ही ये फिर अपने देश लौट जाते हैं।
विदेशी पक्षियों की मौजूदगी न केवल चंबल सेंचुरी की जैव विविधता को समृद्ध बनाती है, बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी यह क्षेत्र विशेष महत्व रखता है। प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के लिए यह नज़ारा किसी उत्सव से कम नहीं है, जहां हर ओर पंखों की सरसराहट और प्रकृति का अद्भुत सौंदर्य देखने को मिलता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील कुमार