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मुंबई, 4 जनवरी (हि.स.)। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने स्पष्ट कहा कि केवल दावे करने से देश विश्वगुरु नहीं बन सकता, इसके लिए ज़मीनी स्तर पर ठोस काम करना जरूरी है।
गडकरी ने कहा कि भारत को विश्वगुरु बनने के लिए शिक्षा, अनुसंधान, नैतिकता, पारदर्शिता और आत्मनिर्भरता पर गंभीरता से काम करना होगा। जब तक देश ज्ञान, चरित्र और विकास के साथ मानवता का मार्गदर्शन नहीं करेगा, तब तक ‘विश्वगुरु’ बनने का सपना पूरा नहीं हो सकता। योग और आयुर्वेद को मिली वैश्विक मान्यता, संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को स्वीकृति, आधार और यूपीआई जैसी डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, साथ ही अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की उपलब्धियां खासतौर पर चंद्रयान मिशन इस दिशा में आधुनिक उदाहरण हैं।
गडकरी के अनुसार प्राचीन काल में भारत को विश्वगुरु माना जाता था। नालंदा और तक्षशिला जैसे विश्वविख्यात विश्वविद्यालय, उपनिषदों का ज्ञान, भगवान बुद्ध का दर्शन, अहिंसा, सहिष्णुता और ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ जैसी विचारधाराओं के कारण भारत दुनिया को ज्ञान, दर्शन और जीवन जीने की दिशा दिखाने वाला देश था। यही वजह थी कि पूरी दुनिया भारत की ओर देखती थी।उन्होंने कहा कि मध्यकाल में यह परंपरा टूट गई, लेकिन आज़ादी के बाद भारत ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन के माध्यम से नैतिक और सिद्धांत आधारित वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभाने की कोशिश की। हाल के वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कई बार कहा है कि भारत दोबारा विश्वगुरु बन सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार