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शिमला, 04 जनवरी (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश सरकार ने स्कूल क्लस्टर प्रणाली को पूरे राज्य में औपचारिक रूप से लागू कर दिया है। इस का मकसद ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से अलग-थलग पड़े एकल विद्यालयों की समस्या को समाप्त करना है। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने रविवार को कहा कि इस योजना के तहत राज्य में कुल 1,968 स्कूल क्लस्टर बनाए गए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि प्रत्येक बच्चे को चाहे वह किसी भी भौगोलिक स्थान पर हो, अपने स्थानीय स्कूल का आकार कुछ भी हो, उसे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक समान पहुंच मिले। अब प्रत्येक वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला को प्रमुख विद्यालय का दर्जा दिया गया है, जिसके अधीन आने वाले उच्च, माध्यमिक और प्राथमिक विद्यालय अब संबंधित प्रमुख विद्यालय के प्रधानाचार्य के प्रशासनिक नियंत्रण में हैं। प्रधानाचार्यों को पूर्व-प्राथमिक से लेकर 12वीं कक्षा तक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस पहल के तहत स्कूलों को संसाधनों का साझा उपयोग करने का अवसर मिला है, ताकि छोटे विद्यालयों के छात्र हब स्कूलों में उपलब्ध आधुनिक सुविधाओं का लाभ उठा सकें। इन क्लस्टर स्कूलों में आधुनिक आईसीटी प्रयोगशालाएं, विज्ञान प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय और बहुउद्देशीय खेल परिसर उपलब्ध कराए गए हैं। ‘हब-एंड-स्पोक मॉडल’ को अपनाते हुए, प्रदेश सरकार का प्रयास है कि राज्य के हर बच्चे को संसाधनों से समृद्ध और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जाए, जिससे दूरदराज के ग्रामीण स्कूलों और बड़े शहरी संस्थानों के बीच के गुणवत्ता फासले को कम किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली भाजपा सरकार के दौरान बिना वैज्ञानिक योजना और पर्याप्त संसाधनों के हजारों स्कूल खोले गए थे, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ पड़ा था। सरकार ने अब इन स्कूलों का समेकन और पुनर्गठन किया है। इसके तहत 31 दिसंबर, 2025 तक लगभग 770 स्कूलों को बंद किया गया, जिनमें विद्यार्थियों की संख्या शून्य थी, और 532 स्कूलों को नजदीकी स्कूलों में विलय किया गया। इसके अलावा 21 वरिष्ठ माध्यमिक और 21 उच्च विद्यालयों का स्तर घटाया गया या उन्हें बंद कर दिया गया।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा